धन्वंतरी जयंती पर महर्षि भरद्वाज की विशाल प्रतिमा पर दीप दान
रिपोर्ट:आचार्य श्री कांत शास्त्री
प्रयागराज। आज धन्वंतरि जयंती के अवसर पर आयुर्वेद को पृथ्वी पर लाने वाले भारत भाग्य विधाता महर्षि भरद्वाज की विशाल प्रतिमा के समक्ष दीपदान किया गया। दीपदान की अगुवाई डॉ प्रमोद शुक्ला ने करते हुए कहा कि
आपको आश्चर्य होगा लेकिन यह सत्य है कि आयुर्वेद का जन्म प्रयागराज में हुआ । महर्षि भरद्वाज ही पृथ्वी पर आयुर्वेद के जनक हैं। ब्रह्मा से दक्ष प्रजापति ने, दक्ष प्रजापति से अश्वनी कुमार और अश्वनी कुमार से इंद्र ने यह विद्या ग्रहण की। इंद्र से यह विद्या महर्षि भरद्वाज ने प्राप्त की।
सामान्य तौर पर हम यह जानते हैं कि आयुर्वेद के ज्ञाता महर्षि चरक थे।
महर्षि भरद्वाज के 10 शिष्य थे , उनमें एक का नाम अग्निवेश था । अग्निवेश का ही उपनाम चरक था।
महर्षि भरद्वाज के शिष्य चरक ने भरद्वाज जी की सारी शिक्षाओं को ग्रहण कर उसे एक संहिता के रूप में संग्रह किया और इस तरह से आयुर्वेद का ज्ञान हमको प्राप्त हुआ जो मानव जीवन के लिए सर्वश्रेष्ठ है। और इस ज्ञान का अद्भुत है इसी तीर्थों के राजा, प्रयागराज में जन के लिए उपलब्ध हुआ।
डॉ प्रमोद शुक्ला के अलावा आधा दर्जन से अधिक लोगों ने दीपक जलाकर महर्षि भरद्वाज के पूर्ण को स्मरण किया।
अगले वर्ष धन्वंतरी जयंती बड़े पैमाने पर मनाने का निर्णय किया गया।
