लोगों के आकर्षण का केंद्र है भित्ति चित्र,10 दिवसीय भित्ति चित्रकला का हुआ समापन

रिपोर्ट:आचार्य श्री कांत शास्त्री
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज की और से शुक्रवार को 10 दिवसीय भित्ति चित्रकला का समापन हो गया। केंद्र निदेशक प्रोफेसर सुरेश शर्मा ने बताया कि चित्रकला प्राचीन भारतीय लोककला की अति सुन्दर झलक है। वर्ली कोलरी चित्रकला का मुख्य उद्देश्य समाज को जागरूक करना है इसलिए इसका संरक्षण बहुत जरूरी है। लोक कला की विभिन्न शैलियों में 15 कलाकारों ने अद्भूत चित्रकारी की जो हमारी भारतीय संस्कृतिक के जगजीवन की कला को दर्शाती है। कार्यशाला का आयोजन वरिष्ठ कलाकार रवीन्द्र कुशवाहा के सयोजन व दिशानिर्देशन में किया गया।
भारत की सांस्कृतिक विरासत को अद्भुत जीवन्त रूप देने के लिए कई प्रदेशों की लोक कलाए जैसे चौक पुरना, गोंड, आर्ट, राजस्थानी मधुबनी अल्पना और नाथद्वारा पौराणिक लोक कथाओं पर आधारति चित्रकला लोगों को खूब पसंद आई।
इसमें प्रतिभागी कलाकारों में नीरज कुशवाहा, रेनू सिंह, शालिनी कुशवाहा,आरती प्रजापति,अभिषेक गुप्ता,पूनम कुशवाहा वर्षा शाक्या,आशीष कुमार,पूजा सरोज,असरा फातिमा, विष्णु विश्वकर्मा,भीम सिंह,चन्द्रदीप सिंह कुशवाहा, अनिल कुमार आदि ने केंद्र की दीवरों पर भित्ति चित्र कला को उकेर कर कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रर्दशन किया।
