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‘सात्विक’ संस्था की नाट्य प्रस्तुति: जलता हुआ रथ ने उकेरा मानवीय संवेदनाओं को

 

‘सात्विक’ संस्था की नाट्य प्रस्तुति: जलता हुआ रथ ने उकेरा मानवीय संवेदनाओं को

छदम प्रगतिशीलता की तस्वीर नाटक ” जलता हुआ रथ”

प्रयागराज। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की कला – संस्कृति विकास योजना के अनर्गत सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘सात्विक’ द्वारा रविवार को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के प्रेक्षागृह मे ‘जलता हुआ रथ’ का मंचन किया गया।

चर्चित लेखक स्वदेश दीपक द्वारा लिखित एवं युवा रंगकर्मी मोनू खांन के निर्देशन मे मंचित नाटक ‘जलता हुआ रथ’ की प्रभावशाली प्रस्तुति की गयी। नाटक ‘जलता हुआ रथ’ मे वर्त्तमान परिस्तिथियों का संजीव चित्रण किया गया है। आज़ादी और लोकतंत्र एक दूसरे के पूरक अथवा पर्यायवाचि होते है। किन्तु हमारे देश व काल मे दोनोें व्यवहरात: दूर जा पड़े हुए है। और इसका प्रभाव हमारे जीवन, समाज, संस्कृति साहित्य एवं कला माध्यमों पर भी पड़ा है। इन हालत मे ‘जलता हुआ रथ’ अपने कथ्य के साथ – साथ प्रतिकात्मक रूप मे भी इस विडम्बना की ओर संकेत करता है। सुविधाजीविता,भौतिकता, मशीनीकरण तथा छदम प्रगितिशीलता के मौजूदा समय मे मानवीय संवेदना प्रभावित हुई और इसका असर कला जगत पर भी पड़ा है। कला अब विलासिता की वस्तु बन गयी है। यहाँ कला से आशय : संगलत नाटक आदि सभी रूपों से है। संगीत मे “यानी” को लेकर देखी गयी दीवानगी या रंगमंच पर अनुवाद का वर्चस्व इसके कुछ उदहारण है। इस परमुखापेचिता को भी आज़ादी के उसी चरित्र से जोड़कर देखा जाना चाहिए जिसका सबसे सटीक बिम्ब “जलता रथ” रथ” हो सकता है।

नाटक में बाबा की भूमिका में शिव गुप्ता, मुन्ना की भूमिका में प्रिया गंभीर, दुर्गा की भूमिका में शिरीन और झंडे की भूमिका में कौशिक भट्टाचार्य ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शको को बहुत प्रभावित किया। बुढ़ी औरत, नेता, असलम काज़मी, सरदार किशन सिंह, सिपाही, नेता के चमचे और डा. अमृता की भूमिका कर रहे सभी कलाकारों ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया। प्रकाश परिकल्पना सुबोध सिंह का था और संगीत संचालन रोहित यादव ने किया। नाटक की प्रस्तुति परिकल्पना एवं निर्देशन मोनू खांन का था। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से इस नाट्य प्रस्तुति के आयोजन के अतिथि डा० विभा मिश्रा (सहायक निदेशक लघु उधोग एवं सूक्ष्म मंत्रालय भारत सरकार), श्रीमती कल्पना सहाय (सदस्य संगीत नाटक एकेडमी)। कार्यक्रम को सफ़ल बनाने में सुबोध सिंह, अनमोल रावत, अनूप श्रीवास्तव, रतिभान सिंह, शगुफ्ता अस्कारी, मनोज गुप्ता का विशेष योगदान रहा। अंत मे आभार व्यक्त संस्था के सचिव मोहम्मद अफ़ज़ाल ने किया और कार्यक्रम का संचालन सुधीर सिंन्हा का रहा।

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