प्रयाग की धरती बहुत पवित्र धरती है जहां साहिब श्री गुरु गोविंद सिंह जी का माँ के गर्भ में प्रकाश हुआ-महंत ज्ञान सिंह

सरदार पतविन्दर सिंह ने जगह-जगह चौपाल लगाकर गुरु महिमा का वर्णन किया
प्रयागराज/त्याग-वीरता की प्रतिमूर्ति साहिब श्री गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाशउत्सव के उपलक्ष्य में भक्ति भाव माहौल में गुरुद्वारा पक्की संगत में पंथ के प्रसिद्ध रागी जत्था के द्वारा शब्द- कीर्तन,गुरु इतिहास का वर्णन करते हुए कहा कि साहिब श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने धर्म की रक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया प्रयाग की धरती बहुत पवित्र धरती है जहां गुरु का मां के गर्भ में प्रकाश हुआ सुबह से ही गुरुद्वारे में संगतो का आना प्रारंभ हो गया संगत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के आगे मत्था टेककर पंक्तिबद्ध बैठकर गुरबाणी,कीर्तन को आत्मसात किया अरदास,हुकुमनामा के उपरांत गुरु का लंगर छकाl गुरुद्वारा पक्की संगत के मुख्य सेवादार महंत ज्ञान सिंह की देखरेख में प्रकाशोत्सव का आयोजन हुआl
वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा काशी क्षेत्र,क्षेत्रीय उपाध्यक्ष सरदार पतविंदर सिंह ने जनपद प्रयागराज में सर्वधर्म समाज के बीच में साहिब श्री गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन वृत्त पर विस्तार से जगह-जगह चौपाल लगाकर बहुत ही मनोहर ढंग कहा कि साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव की लख लख हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं आपका जीवन और संदेश लाखों लोगों को शक्ति देता है। प्रकाशपर्व के अवसर पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। क्षेत्रीय उपाध्यक्ष सरदार पतविंदर सिंह ने आगे कहा कि सिखों के 10वें गुरु साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाशोत्सव पूरे विश्व में मनाया जा रहा है सिख समुदाय में यह दिन बहुत बड़ा और खास दिन माना जाता है। साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी एक महान योद्धा और धार्मिक व्यक्ति थे। साहिब श्री गुरु गोविंद सिंह जी शौर्य,साहस, पराक्रम और वीरता के प्रतीक श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिखों को पंच ककार धारण करने का आदेश दिया था। ये पांच चीजें ये है। केश, कड़ा, कच्छा, कृपाण और कंघा। साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के द्वारा दी गई शिक्षाएं आज भी लोगों को प्रेरणा दिलाती है।
