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 बच्चों के व्यक्तित्व के बहुमुखी विकास के लिये बाल रंगमंच का किया गया आयोजन

 बच्चों के व्यक्तित्व के बहुमुखी विकास के लिये बाल रंगमंच का किया गया आयोजन

बाल रंगमंच बच्चों में छुपु ऊर्जा, शक्ति, प्रतिभा और रचनाशीलता को जानने का साधन है

अभिव्यक्ति के लिए अभ्यास इस अभ्यास के अंतर्गत बच्चों के – ग्रुप को किसी एक विषय देकर उस पर बोलने को कहा जाता है, कुछ बच्चे बहुत तेजी से विषय पर अपनी राय देते हैं लेकिन कुछ बच्चे कुछ भी नहीं बोलते। बाद में इस ग्रुप के आधे-आधे बच्चों को दो ग्रुप में बांटकर एक विषय दिया जाता है और एक खास समयान्तराल देकर उन्हें अलग-अलग बातचीत करने को छोड़ दिया जाता है। ग्रुप बांटते समय कुछ नहीं बोलने वाले बच्चों को यह आजादी दी जाती है कि वह अपनी पसंद के ग्रुप को खुद चुनें। समयान्तराल (20-25 मिनट) में अभ्यास कराने वाले व्यक्ति इस बात पर खास तौर पर नजर रखता है कि शुरू में कुछ भी नहीं बोलने वाला बच्चा अपने साथियों से बातचीत कर रहा है कि नहीं? जब दुबारा दोनों ग्रुप के बच्चे को एक विषय देकर उस पर और प्रतिपक्ष में बोलने को कहा जाता है तो प्रत्येक बच्चे को सख्त हिदायत दी जाती है कि वे आवश्य अपनी राय दे चाहे वह एक लाइन ही बोले । इससे शुरू में कुछ भी न बोलने वाला बच्चा एक लाइन बोलता है और फिर उसका आत्मविश्वास बढ़ता जाता है और उस वाद-विवाद में उसकी भागीदारी दिन-प्रतिदिन बढ़ता जाता है उक्त बातें प्रबुद्ध फाउंडेशन और राष्ट्रीय शिशु विद्यालय के संयुक्ता तत्वावधान में मम्फोर्डगंज स्थित राष्ट्रीय शिशु विद्यालय में सात से सत्रह आयु वर्ग के बच्चों के सृजनात्मक, कलात्मक और व्यक्तित्व विकास के लिये चलाई जा रही द्वितीय शीतकालीन प्रस्तुतिपरक बाल रंग कार्यशाला के संयोजक आईपी रामबृज ने कही।
आईपी रामबृज ने आगे बताया कि सुख व दुख के पल इस अभ्यास के अंतर्गत बच्चों को छोटे-छोटे – ग्रुप में बाँट दिया जाता है और हर बच्चे को मौका दिया जाता है कि वो अपने सुख या दुख के पलों को पुनः सृजन करे अपने ग्रुप के बच्चों को लेकर इस इंप्रोवाइजेशन में अपने सुख या दुख के पल को बताने वाला बच्चा वही भूमिका (अपना दुख का रोल) ही करेगा। बाँकी बच्चों को अपनी सिचुएशन के हिसाब से भिमिकाए देगा, अर्थात घटना के समय उपस्थित प्रमुख लोगों की भूमिकाएँ फिर उन्हें बताएगा कि उन्हें कब, क्या, कहाँ, कैसे करना है। ऐसे करने से बच्चे की विज्वलाइजेशन क्षमता बढ़ती है, पुनः याद करने की क्षमता बढ़ती है, विश्लेषण करने की आदत भी पड़ती है और निर्देश देने के गुण का भी विकास होता है।
आईपी रामबृज ने बताया कि एक सफ्ताह के बाद विश्लेषण के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बाल- रंगमंच बच्चों के व्यक्तित्व के बहुमुखी विकास के लिए एक शक्तिशाली माध्यम है। रंगमंच बच्चों का मुक्ति स्थल है, और यह तन और मन के लिए खेल का मैदान है। बाल रंगमंच बच्चों में छिपी शक्ति, ऊर्जा, प्रतिभा और रचनाशीलता को जानने पहचानने और प्रस्फुटित एवं उत्प्रेरित करने का जबर्दस्त साधन है। बच्चों को खेलना सबसे ज्यादा पसंद है और रंगमंच इस खेल-खेल में ही बच्चों के शारीरिक, मानसिक और आत्मिक विकास का सबसे सशक्त माध्यम है। रंगमंच एक ऐसा माध्यम है जहां सभी वर्गों के बच्चे मिलकर एक साथ सीखने, समझने, जानने के उद्देश्य से मजे मजे में खेलते हुए उपर्युक्त गुणों को अपने अंदर विकसित करते हैं। अलग-अलग आयु वर्ग के बच्चे अपनी जिंदगी, परिवार, समाज और संसार के विषयों पर रंगमंच से जुड़े माध्यमों (अभिनय, कविता, कहानी, गीत-संगीत, क्राफ्ट, पेंटिंग और नाट्य- रचना जिसमें इतिहास, भूगोल, विज्ञान आदि सभी कुछ समाहित है।) का समूह में उपयोग करते हैं। इस क्रियाकलाप का बच्चों के अवचेतन मन पर सीधा और गहरा असर होता है जो पूरी जिंदगी उनके साथ चलता है और उन्हें एक अच्छा नागरिक बनाए रखने में सहायक साबित होता है।

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