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हर्बल उत्पाद से असाध्य बीमारी को किया जा सकता है नियंत्रित – प्रो. एन. बी. सिंह

हर्बल उत्पाद से असाध्य बीमारी को किया जा सकता है नियंत्रित – प्रो. एन. बी. सिंह


नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से मंगलवार काे वानस्पतिक उद्यान हर्बल उद्यान नवग्रह वाटिका मशरूम उत्पादन प्रयोगशाला तथा हर्बल उत्पाद केंद्र के उद्घाटन समारोह आयाेजित किया गया,मुख्य वक्ता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. एन. बी. सिंह ने विभिन्न औषधीय पादप प्रजातियों का विमारियों के नियंत्रण हेतु जैसे कैंसर डायबिटीज़ को रोककर उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त हेतु उपयोगी बताया,साथ ही पंचतत्वों की संज्ञा को मानव निहितार्थ सही प्रयोग हेतु सुझाव दिया,फॉरेस्ट रिसर्च सेंटर इको रिहैबिलिटेशन, प्रयागराज के प्रमुख डॉ संजय सिंह ने प्राकृतिक उत्पादों को उपयोगिता एवम मानव कार्यकी में सम्यक तादात्म्य हेतु उपयोगी बताया साथ ही गंगा क्षेत्र में विभिन्न ग्रांट को प्राप्त करने पर अनुमोदन किया,वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ कुमुद दुबे व डॉ आलोक यादव ने पवित्र उपस्थिति से मंच को संभाला,विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि पादप प्रकृति की सर्वश्रेष्ठ कृति है इससे मानव जीवन को मानवता के उत्थान हेतु शील व विनय के साथ उत्पादन बढ़ाने में किया जाना चाहिए, विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ आशीष शिवम ने अपने सम्बाेधन में कहा कि सभी विभाग कुछ उत्पादन हेतु आगे आए,डॉ प्रबुद्ध मिश्रा ने विषयवस्तु के साथ अतिथि के वैज्ञानिक योगदान को बताया,डॉ आदि नाथ ने विषय संयोजन किया तथा डॉ प्रदीप उपाध्याय ने कार्यक्रमकी प्रासंगिकता को बताया,डा. शक्ति नाथ त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया डॉ धीरज पांडेय ने रिसर्च स्केल अप क्षेत्र की उपयोगिता पर प्रकाश डाला,धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री आर. एल. विश्वकर्मा ने किया,इस प्रकार वनस्पति विज्ञान विभाग से स्टार्टअप योजना के तहत हर्बल उत्पाद में दालचीनी,सतावर, कालमेघ,सेना,मूसेंद्रा,आयु तुलसी,जरा तुलसी,आर्टीमीसिया, अश्वगंधा,सर्पगंधा,स्टीविया, पयरेथरूम,खस खस,अर्जुन, हरड़,बहेड़ा,आंवला,गिलोय, गुड़मार,सिट्रस चाय,शिवलिंगी व कुचला के बीज,ताजी व सुखी पत्ती,छाल व जड़ की उचित दर पर प्राप्त कर सकते है,साथ ही पादप नर्सरी से सभी प्रकार के सजावटी पौधे उचित मूल्य पर हर्बल प्रोडक्ट सेंटर से रशीद कटवाकर प्राप्त कर सकते हैं,मशरूम की भारतीय प्रजाति प्ल्यूरोटस व शिट्टेक मशरूम की सुविधा सेवा हेतु उपलब्ध है,इस दिशा में स्टीविया की रुबंडियना प्रजाति का प्रस्ताव विभाग को प्राप्त हुआ है इस हेतु रिसर्च स्केल क्षेत्र में विभाग द्वारा उत्पादन को बढ़ाने हेतु अनुकूलित किया जा रहा है,इस तरह के और भी प्रस्ताव का स्वागत करते हैं,छात्रों के प्रश्नोत्तरी की जिज्ञासा का निस्तारण किया गया,कार्यक्रम में प्रो. विनोद पांडेय डॉ अर्चना शुक्ला डॉ सूक्रत सिन्हा डॉ अमिताभ चन्द्र द्विवेदी विजय कुमार राजशेखर झा रूबी रानी डॉ किरन गुप्ता तथा प्रयोग सहायक अंशुमान दुबे मुन्नीलाल सहित स्नातक परास्नातक शोध के सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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