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समदरिया स्कूल में अखंड मानस पाठ के समापन अवसर पर पुरी शंकराचार्य अधोक्षजानंद ने दिए आशीर्वचन

श्री राम चरित मानस सनातन संस्कृति की अमूल्य निधि है l मध्यकाल की विसंगतियों के दौर में जनसामान्य को उच्च आदर्शों के अवलंबन की आवश्यकता थी,जिसे आचार्य तुलसी ने पूरा किया।यह बातें जगतगुरु शंकराचार्य पूरी स्वामी अधोक्षजानन्द ने व्यक्त किया, दांदूपुर स्थित समदरिया स्कूल में अखंड मानस पाठ के समापन अवसर पर बोल रहे थे।उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य के सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य का साहित्यिक ,धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आदि सभी दृष्टि से अनुपम महत्व है l इस ग्रंथ में मानव जीवन की सभी परिस्थितियों के समावेश के साथ आदर्श मानवीय मूल्यों एवं सांस्कृतिक मर्यादाओं का विराट रूप परिलक्षित होता है।
रामचरित मानस भारतीय संस्कृति की वह गौरवगाथा है जिसकी अमरवाणी लगभग 500 वर्षों से निरंतर भारत ही नहीं दुनिया के विभिन्न हिस्सों में गूँज रही है और जनमानस को ताक़त प्रदान कर रही है।
इसके पूर्व जगद्गुरु के सानिध्य में मंत्रोच्चार के साथ हवन आहुति व विधानपूर्वक अनुष्ठान संपन्न हुआ।संस्थान के निदेशक डॉ मणि शंकर द्विवेदी ने स्वागत किया, वरिष्ठ पत्रकार पी एन द्विवेदी ने जगतगुरु शंकराचार्य के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला, कार्यक्रम का संचालन डॉ अम्बिका पांडेय ने तथा आभार ज्ञापन पी0 के0 तिवारी ने किया।इस अवसर पर प्रमुख रूप से समाजसेविका आभा सिंह, डॉ रमा सिंह, डॉ बबली द्विवेदी डॉ अंबिका पांडेय, राघवेन्द्र प्रताप सिंह , राजेश शुक्ल, कमल कुमार, नागेंद्र प्रसाद पांडेय , महेन्द्र सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।

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