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विद्यार्थियों को आचरण का भी ज्ञान दे शिक्षक- प्रोफेसर सिंह

विद्यार्थियों को आचरण का भी ज्ञान दे शिक्षक- प्रोफेसर सिंह

 

मुक्त विश्वविद्यालय के शिक्षा विद्या शाखा में व्याख्यान का आयोजन

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में बुधवार को रजत जयंती वर्ष के अवसर शिक्षा विद्या शाखा के तत्वाधान में व्याख्यान का आयोजन किया गया । व्याख्यान की अध्यक्षता प्रोफेसर पी.के स्टालिन, निदेशक शिक्षा विद्या शाखा ने की एवं बतौर मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता प्रोफेसर श्री शिव मोहन सिंह, पूर्व कुलपति, डॉ राम मनोहर लोहिया, अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या थे। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्रोफेसर छत्रसाल सिंह एवं विषय प्रवर्तन प्रोफेसर पी.के. पांडेय ने किया। संचालन श्री परविंद कुमार वर्मा एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुरेंद्र कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा विद्या शाखा के समस्त शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने प्रतिभाग किया।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि प्रोफेसर शिव मोहन सिंह, पूर्व कुलपति, डॉ राम मनोहर लोहिया, अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या ने कहा कि आज शिक्षा में ज्ञान के साथ-साथ आदर्श की आवश्यकता है । आचार्य किताबी ज्ञान के साथ-साथ विद्यार्थियों को आचरण का भी ज्ञान दें, जिसके दम पर विद्यार्थी अपने ज्ञान का उपयोग देश व समाज के सकारात्मक विकास में करें। किताबी ज्ञान अधिक हो जाने से आदर्श का ज्ञान संभव हो पाएगा, इसलिए हमें विद्यार्थियों को निरंतर परिवर्तन के दौर से गुजरते हुए भी अनुभव कराने का प्रयास करना चाहिए कि आपका जीवन क्या केवल किताबी ज्ञान तक सीमित हो जाए या उस ज्ञान का समाज में उपयोग हो, इसका भी ध्यान कराना चाहिए। अपने अनुभव के माध्यम से प्रोफेसर सिंह ने कहा कि आज विश्वविद्यालयों की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। वहां प्रत्येक विद्यार्थी केवल ज्ञान प्राप्त करने और नौकरी के पीछे अपनी पूरी उम्र खपा देने में ज्यादा कार्यरत रहता है। कभी देश व समाज के बारे में सोचने या उसके लिए कुछ करने हेतु तत्पर दिखाई नहीं देता है। यह कमी क्यों है? यह बहुत ही चिंता एवं चिंतन का विषय है। इस पर हमें निरंतर सोचने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय में अनुशासन मजबूत होना चाहिए।
हम मातृभूमि या राष्ट्र से प्रेम की भावना विद्यार्थियों में भरे तो हमारा राष्ट्र उन्नति की ओर अग्रसर होगा। इसके लिए शिक्षक को भी पूरी तरीके से पुस्तकीय ज्ञान से निकल कर अपने आदर्शों के माध्यम से समाज में आना होगा । समाज के प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा जगत से अवगत कराते हुए मजबूत करना होगा।

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