योग से ही आनंद की अनुभूति-अपर मुख्य सचिव,मु.विवि में थैरेप्यूटिक योग पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी प्रारम्भ

रिपोर्ट:कुलदीप शुक्ला
उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के रजत जयंती वर्ष में स्वास्थ्य विज्ञान विद्या शाखा के तत्वावधान में इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर योगिक साइंसेज, बेंगलुरु द्वारा अनुदानित थैरेप्यूटिक योगा पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशाला का उद्घाटन विश्वविद्यालय के अटल प्रेक्षागृह में किया गया। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि श्री अनिल कुमार, आईएएस, अपर मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ ने कहा कि हर समय जीवन में आनंद की अनुभूति हम सभी के जीवन का लक्ष्य है। जिसे योग के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। योग को सर्वमान्य रूप से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। आध्यात्मिक यात्रा को आज के विज्ञान की यात्रा के साथ जोड़ सकें, नए आयाम स्थापित कर सकें, इसके लिए हमें योग के अष्टांगिक मार्गों का अनुसरण करना चाहिए। श्री कुमार ने कहा कि प्राणायाम का प्रभाव मस्तिष्क पर पड़ता है। प्राणायाम शरीर और मन के बीच का सेतु है। मन को नियंत्रित करके योग के चरम बिंदु तक पहुंचा जा सकता है। मन को स्थिर करने, चित्त वृत्ति निरोध की यात्रा भी योग के द्वारा ही संभव है। हम राग द्वेष में उलझे हुए हैं। चेतन तत्व को नहीं देख पाते हैं क्योंकि प्रकाश पर आवरण पड़ा है। यम और नियम से ही हमारे विचारों में शुद्धता आती है।
अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर अविनाश चन्द्र पांडेय, निदेशक, आईयूएसी, नई दिल्ली ने कहा कि योग विज्ञान महत्वपूर्ण धरोहर है। योग विज्ञान केंद्र की स्थापना प्रधानमंत्री ने की। योग को व्यापक अर्थ में जीवन का अंग बनाएं। आज यौगिक संस्थानों में प्रमाणिकीकरण की आवश्यकता है। योग के साधक आएं और योग की विधाओं से जनमानस को लाभान्वित करें। आज योग को उसके वास्तविक रूप में समझना होगा, जिससे समाज का उन्नयन हो एवं मानवता का भला हो।
सारस्वत अतिथि एवं बीज वक्ता डॉ मिलिंद देवगोयंकर, निदेशक, आरोग्य धाम, चित्रकूट ने कहा कि योग का मस्तिष्क के ऊपर असर होता है। योग करने से मस्तिष्क का वॉल्यूम बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि यह प्रतिपादित हो चुका है कि ऊं का उच्चारण करने से मन की स्थिरता बढ़ती है।
प्रारंभ में संगोष्ठी के संयोजक एवं स्वास्थ्य विज्ञान विद्या शाखा के निदेशक प्रोफेसर जी एस शुक्ल ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह के निर्देशन में आयोजित संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डॉ देवेश रंजन त्रिपाठी एवं धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव श्री विनय कुमार ने किया।
दूसरे सत्र में डॉ अभिषेक सचदेव ने कार्डियोलॉजी एवं योग पर डॉ अनुभा श्रीवास्तव ने एंड्रोक्राइनोलॉजी एवं योग पर व्याख्यान दिया।
इस अवसर पर लोक एवं जनजाति कला एवं संस्कृति संस्थान, लखनऊ तथा अयोध्या शोध संस्थान, लखनऊ के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत सुषमा शर्मा के निर्देशन में उठो अहिल्या नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई।
संगोष्ठी का समापन 4 फरवरी को अपराहन 2:30 बजे होगा। समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रोफेसर एस पी मणि त्रिपाठी, कुलपति, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय, अमरकंटक, मध्य प्रदेश होंगे।
