पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उनको श्रद्धांजलि अर्पित किया गया

माघ मेला क्षेत्र स्थित सेक्टर 2 के महावीर मार्ग स्थित पंडाल में लोक पहल के तत्वावधान में अतुल द्विवेदी के संयोजन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती मनाई गई । स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज श्री के आशीर्वाद एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के पश्चात कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऋषि तुल्य व्यक्ति थे उन्होंने जगद्गुरु शंकराचार्य पर विशेष ग्रंथ का प्रणयन किया है जो संतो के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा पंडित जी का विचार है कि
भारतीय राष्ट्रवादी, हिंदू राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति हिंदू संस्कृति है।
अपने उद्बोधन में लोकपहल के संयोजक डॉ वी के सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय राजनीतिक चिंतक और राजनेता थे। उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संगठनकर्ता भी रहे। उन्होंने भारतीय सनातन परंपरा को नवीनतम युग के अनुसार करने के लिए एकात्म मानववाद की विचारधारा प्रकट किया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के नगला चन्द्रभान गाँव में हुआ था । इस जगह को अब दीनदयाल धाम कहा जाता है।
भारतीय जन संघ 1951 में जब जनसंघ बना तब उन्हें उत्तर प्रदेश शाखा के महासचिव और बाद में अखिल भारतीय महासचिव नियुक्त किया गया था। 15 वर्षों तक, वह संगठन के महासचिव बने रहे।
डॉ अरुण कुमार त्रिपाठी ने उद्बोधन में कहा कि प. दीनदयाल उपाध्याय ने राजनीतिक दर्शन एकात्म मानवतावाद की कल्पना की। यह दर्शन शरीर, मन और बुद्धि और प्रत्येक इंसान की आत्मा के एक साथ लाने को प्रयासरत है। अंतोदय “समाज की अंतिम पंक्ति के व्यक्ति का उदय”, जिसका सरल भावार्य है पिछड़े लोगों क उत्थान करना।
अपने वक्तव्य में अतुल द्विवेदी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक तरीके से भारतीय संस्कृति की उन्नति में सर्वदा लगे रहे।
इस अवसर पर आलोक चौहान, अजय मिश्र, हरिश्चन्द्र, विनय वर्मा, दिलीप सिंह पटेल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं श्रद्धालु उपस्थित थे।
