बच्चों को अच्छे संस्कार दें-सांसद केशरी देवी

रिपोर्ट:कुलदीप शुक्ला
उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के स्वास्थ्य विज्ञान विद्या शाखा एवं रुद्रप्रयाग विद्या मंदिर, शांतिपुरम के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को पेरेंटिंग स्टाइल: पैरंट्स चाइल्ड रिलेशनशिप इन स्कूल गोइंग चिल्ड्रन विषय पर आयोजित कार्यशाला की मुख्य अतिथि श्रीमती केशरी देवी पटेल, सांसद ने कहा कि माता-पिता बच्चों को अच्छे संस्कार दें, जिससे वह भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाएं। शिक्षक बच्चों को आदर्श नागरिक बनाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने बच्चों से खचाखच भरे अटल प्रेक्षागृह में कहा कि अच्छी से अच्छी शिक्षा ग्रहण करवाकर माता-पिता बच्चों के जीवन को सार्थक बनाएं। बच्चों को भी चाहिए कि वह अपने गुरुजनों का सम्मान करें। आजकल के बच्चे समझदार हो गए हैं। मन लगाकर शिक्षा ग्रहण करें। कोशिश सब को करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सोरांव एवं नवाबगंज विधानसभा से अच्छे बच्चे निकल रहे हैं। खेलो इंडिया में क्षेत्र का नाम रोशन किया है। गांव वालों को अपने बच्चों को प्रेरणा देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। देश की समृद्धि के लिए वह अपना महत्वपूर्ण योगदान करेंगे। उन्होंने बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आज लड़कियां फाइटर प्लेन उड़ा रही हैं। हमें उन्हें आगे निकलने से नहीं रोकना चाहिए। उन्होंने बच्चों को मोबाइल से दूर रहने की सलाह दी। संसद केशरी देवी पटेल ने कहा कि हमें जल संग्रहण पर विशेष ध्यान देना होगा। पानी बचाने की मुहिम चलानी होगी। जलस्तर बहुत तेजी से नीचे जा रहा है। हर लोकसभा क्षेत्र में 75 तालाब बनाने का निर्णय लिया गया है। पानी के बिना जीवन नहीं रह सकता। जल का दोहन रोकना होगा। बच्चों को इस दिशा में घर से प्रयास करने की आवश्यकता है।
अध्यक्षता करते हुए मुक्त विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह ने कहा कि कि जीवन के किस मोड़ पर बच्चों को सही ढंग से कैसे समझाए जाय यह कार माता पिता सही ढंग से कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पीढ़ी दर पीढ़ी रिश्तों में बदलाव आते हैं। इधर 5-10 वर्षों में बहुत तेजी से बदलाव आ रहे हैं। रिश्तों में दूरियां समाप्त करने के लिए मेलजोल बढ़ाना होगा। बच्चों को समझने का प्रयास करना होगा। प्रोफेसर सिंह ने कहा कि आजकल के बच्चों को हेलीकॉप्टर पेरेंट्स तथा बुलडोजर पेरेंट्स नहीं चाहिए।
विशिष्ट अतिथि श्री प्रभाकर त्रिपाठी, डीआईजी, सीआरपीएफ ने कहा कि शिक्षा के मंदिर में मिला ज्ञान बच्चों का भविष्य निर्धारित करता है। गुरुओं का आशीष बच्चों के व्यक्तित्व में बदलाव ला सकता है। माता पिता अपने बच्चों को इस योग्य बनाएं कि वे समाज में सम्मानजनक पद प्राप्त कर सकें।
कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय के सरस्वती परिसर स्थित अटल प्रेक्षागृह में किया गया। प्रारंभ में कार्यशाला तथा स्वास्थ्य विज्ञान विद्या शाखा के निदेशक प्रोफेसर जी एस शुक्ल ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन डॉ मीरा पाल तथा धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव श्री विनय कुमार ने किया। कार्यशाला में मनोवैज्ञानिक श्री कमलेश तिवारी एवं मनोवैज्ञानिक सलाहकार डॉ रंजना तिवारी ने अभिभावकों की जिज्ञासाओं को शांत किया। कार्यशाला में रूद्रप्रयाग विद्या मंदिर की प्रधानाचार्य डॉ गौरी द्विवेदी, डॉ दिनेश सिंह, डॉ अजेंद्र मलिक, डॉ दीप्ति श्रीवास्तव, श्री अमित सिंह आदि उपस्थित रहे।
