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हनुमान जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में संगम नगरी में श्री बड़े हनुमान जी का हुआ महाभिषेक, जय श्रीराम की गूंज

हनुमान जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में संगम नगरी में श्री बड़े हनुमान जी का हुआ महाभिषेक, जय श्रीराम की गूंज

– 108 लीटर दूध, दही, घी, शहद, रस और पंचामृत से हुआ अभिषेक
– बाघंबरी मठ के महंत बलबीर गिरी जी महाराज ने किया पूजन-अर्चन

प्रयागराज: प्रयागराज के संगम तट स्थित लेटे श्री बड़े हनुमान मंदिर में गुरुवार सुबह से ही आस्था का सैलाब उमड़ा। हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर दूर राज्यों से हजारों भक्त हनुमान जी के दर्शन और पूजन करने पहुंचे। चैत्र शुक्ल पक्ष की उदया तिथि पूर्णिमा पर श्री बड़े हनुमान जी का महाभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद, रस और पंचामृत से बाघंबरी मठ के महंत बलबीर गिरी जी महाराज ने हनुमान जी का अभिषेक किया।
प्रभु श्रीराम के अन्नय भक्त शिव के अवतार महाबली हनुमान के जन्मोत्सव पर संगम नगरी में भक्तिमय माहौल रहा। जल्द सुबह से ही भक्तों की कतार लगनी शुरू हो गई थी। पट खुलते ही भक्तों ने बड़े हनुमान जी के दर्शन किए। सुबह दस बजे श्री बड़े हनुमान जी का महाभिषेक शुरू किया। बाघंबरी मठ के महंत बलबीर गिरी जी महाराज ने भव्य तरीके से महाश्रृंगार और महाभिषेक किया।

दो घंटे तक चला महाभिषेक
51 ब्राह्मण और आचार्यों की उपस्थिति और मंत्रोच्चारण से बाघंबरी मठ के महंत बलबीर गिरी जी महाराज ने 108 लीटर दूध, 31 लीटर दही, 11 किलो गो घी, 11 किलो शहद, 11 किलो रस और 51 किलो पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। बलबीर गिरी जी महाराज ने सबसे पहले पुष्प प्रभु को चढ़ाए। इसके बाद जल, दूध, दही, घी, शहद, गन्ने का रस, पंचामृत, अश्वगंधा, गुलाब और गंगाजल से अभिषेक किया। सुबह दस बजे से 12 बजे तक अभिषेक हुआ। भक्तों में भी गजब का उत्साह देखने को मिला। इस दौरान मंदिर परिसर श्रीराम के जयकारों से गूंजता रहा।

भव्य तरीके से सजाया गया मंदिर
पूरे मंदिर परिसर को करीब 10 क्विंटल पुष्प से सजाया गया। वहीं, श्रद्धालुओं के लिए पंडाल की व्यवस्था की गई। सुबह ही भंडारा भी शुरू कर दिया गया। वहीं, शाम चार बजे महाआरती और सामूहिक सुंदरकांड का पाठ किया गया।

अनोखा मंदिर है प्रयागराज में
महंत बलबीर गिरी जी महाराज ने बताया कि एकमात्र मंदिर है जिसमें हनुमान जी लेटी हुई मुद्रा में हैं। यहां पर स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा 20 फीट लंबी है। संगम किनारे बना ये एक अनूठा मंदिर है। ऐसी मान्यता है कि संगम का पूरा पुण्य हनुमान जी के दर्शन के बाद ही पूरा होता है।

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