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साक्षरता, स्वाध्याय, स्वच्छता, समरसता, भारतीय संस्कृति एवं देशभक्ति संस्कार केंद्र के यह 6 आयाम है-शेषधर द्विवेदी

साक्षरता, स्वाध्याय, स्वच्छता, समरसता, भारतीय संस्कृति एवं देशभक्ति संस्कार केंद्र के यह 6 आयाम है-शेषधर द्विवेदी

संस्कार केंद्रों में 16 संस्कार बताने की विशेष आवश्यकता है- अव्यक्तराम मिश्र,रानी रेवती देवी में चल रहे पांच दिवसीय सेवा शिक्षा प्रशिक्षण वर्ग का समापन, विद्या भारती से संबद्ध काशी प्रांत के रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज राजापुर, प्रयागराज में प्रधानाचार्य बांके बिहारी पांडे के संयोजन में चल रहे सेवा शिक्षा प्रशिक्षणार्थियों के 5 दिन का प्रशिक्षण वर्ग आज संपन्न हुआ l
विद्यालय के संगीताचार्य एवं मीडिया प्रभारी मनोज गुप्ता ने बताया कि समापन समारोह के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में इलाहाबाद डिग्री कॉलेज के इतिहास विभाग से अवकाश प्राप्त डॉ अव्यक्त राम मिश्र ने कहा कि वैदिक काल में वर्णाश्रम व्यवस्था रही। उन्हीं वर्णाश्रम व्यवस्था के अंतर्गत 16 संस्कारों की मान्यता थी हमारे उपनिषद इसके गवाह हैं वह सोलह संस्कार विलुप्त हो गए हैं आज के भौतिकवादी युग में हमें केवल 3 संस्कार ही दिखाई देते हैं पहला जन्मोत्सव दूसरा वैवाहिक संस्कार और तीसरा अंत्येष्टि, इन तीनों के अलावा शेष 13 संस्कार आज की पीढ़ी से पूछा जाए तो वे इसमें अनभिज्ञ माने जाएंगे l आप तो संस्कार केंद्र चलाने वाले शिक्षक हैं आपको कम से कम 16 संस्कार मालूम होना चाहिए क्योंकि आप संस्कार केंद्र चलाते हैं उन्हीं सोलह संस्कारों में विद्यारंभ संस्कार एक प्रमुख संस्कार है जिसे आप अपने केंद्रों पर कराएं संख्या में वृद्धि होगी l शिशु मंदिर एवं विद्या मंदिर यह संस्कार करना प्रारंभ कर चुके हैं आवश्यकता है इस संस्कार को संस्कार केंद्रों पर भी कराया जाए विद्यार्थी गुरुकुल से जब शिक्षा प्राप्त करके निकलता था तो उसे किसी कपड़े से ढक दिया जाता था ताकि सूरज की रोशनी भी फीकी ना हो जाए l तत्पश्चात भारतीय शिक्षा समिति पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक शेषधर द्विवेदी ने संस्कार केंद्रों में पढ़ने वाले भैया/ बहनों को दैनिक जीवन में प्रातः से सायं तक छोटे-छोटे छात्र-छात्राओं को किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है उन्हें कहां संस्कार की आवश्यकता है यह भी हमें संस्कार केंद्रों पर बताने की जरूरत है उन्होंने संस्कार केंद्रों में प्रयुक्त होने वाले छह आयामों साक्षरता, स्वास्थ्य , स्वाध्याय, समरसता, देशभक्ति और भारतीय संस्कृति की विस्तार से चर्चा करते हुए उनके महत्व को बताया l और अंत में अपने अध्यक्षीय आशीर्वचन में सुप्रसिद्ध समाजसेवी मिल्कियत सिंह बाजवा ने सभी प्रशिक्षणार्थियों को अपने शुभाशीष से अभिसिंचित करते हुए कहा कि संस्कार केंद्र पर आने वाले भैया बहनों को यदि हम अपनी मूल विचारधारा से जोड़ेंगे तो हमारा राष्ट्र उन्नति की ओर अग्रसर होगा l
विद्यालय के प्रधानाचार्य बांके बिहारी पांडे ने स्वागत तथा प्रबंधक एवं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के शासकीय अधिवक्ता शिव कुमार पाल ने मंच पर उपस्थित अतिथियों एवं प्रशिक्षणार्थियों का आभार ज्ञापन किया l इस अवसर पर क्षेत्रीय सेवा प्रमुख योगेश जी, काशी प्रांत के सेवा प्रमुख कमलाकर तिवारी, सह सेवा प्रमुख नरसिंह नारायण , गोरक्ष एवं नेपाल के सेवा शिक्षा संयोजक राघव जी , कुंदन कुमार, कपिल देव सिंह,अवधेश कुमार गुप्ता, कामाख्या प्रसाद द्विवेदी, शैलेश कुमार यादव, सुनील कुमार गुप्ता, शशि कपूर गुप्ता, प्रेम सागर मिश्रा, अनूप सिंह, प्रवीण कुमार तिवारी एवं राकेश तिवारी की उपस्थिति प्रमुख रही l
कार्यक्रम का कुशल एवं सफल संचालन दिनेश कुमार शुक्ला ने किया l

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