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डॉ.राजेंद्र कुमारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें याद किया गया तथा श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया

डॉ.राजेंद्र कुमारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें याद किया गया तथा श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया

महान स्वतन्त्रता सेनानी,आदर्श राजनेत्री,कुशल शिक्षिका, पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत सरकार एवं पूर्व राज्यपाल डॉ.राजेंद्र कुमारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर पूर्व कुलपति बीएचयू प्रो गिरीश चन्द्र त्रिपाठी, पूर्व विधायक अशोक बाजपेई सहित अनेक लोगों ने पुष्पांजली अर्पित किया।
अपने संबोधन में प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा कि स्वर्गीय श्रीमती बाजपेई जी कुशल नेत्री तथा आदर्श शिक्षिका थीं। इनके जीवन से प्रेरणा लेते हुए हमें राजनीति एवं शिक्षा के क्षेत्र मैं सुधार करना चाहिए। उनके देश के प्रति प्रेम की भावना का हमें अनुकरण करना चाहिए। उन्होंने बचपन में ही अंग्रेजो के खिलाफ लड़ा था।अपने उद्बोधन में अशोक बाजपेई ने कहा की अम्मी के आदर्शों पर चलते हुए मेरा पूरा परिवार आज देश सेवा में लगा हुआ है। जब भी मैं संकट में होता हूँ तब उनके बताए गए रास्ते पर चलकर संकट से निजात पाता हूँ।
ध्यातव्य है कि डॉ राजेंद्र कुमारी बाजपेई का जन्म 8 फ़रवरी 1925 को बिहार के भागलपुर जिले के लालूचक में पंडित एस के मिश्रा के यहाँ हुआ था। वे रविशंकर शुक्ल की नातिन थी और श्यामा चरण शुक्ल और विद्या चरण शुक्ल की भांजी। विद्यालयी शिक्षा के पश्चात उन्होने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा तथा पी॰ एच॰ डी॰ की।

उनकी शादी पेशे से शिक्षक और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले डी.एन. बाजपेयी से 1947 में हुई। जिससे उन्हें एक पुत्र अशोक बाजपेयी और एक सुपुत्री डॉ॰ मनीषा द्विवेदी हुई। उनके पुत्र हर्ष बाजपेई समय शहर उत्तरी प्रयागराज के विधायक हैं।
वे 1962 से 77 तक उत्तर प्रदेश की विधान सभा की सदस्या रहीं। इस दौरान वे उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्षा भी रही। वे पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की बेहद करीबी मानी जाती रही हैं। स्वतंत्रता संघर्ष के समय पं.जवाहरलाल नेहरू के आह्वान पर बचपन में ही इंदिरा गांधी के साथ वानर सेना में अंग्रेजों का मुकाबला किया था । 1970 से 1977 के दौरान वे उत्तर प्रदेश में कई मंत्रालयों का नेतृत्व किया। इसके बाद वे 1980 में सीतापुर से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुई और यहीं से उन्होने लगातार 1984 और 1989 में भी लोकसभा के लिए चुनी गयी। वे 1984 से 1986 तक केंद्रीय सामाजिक कल्याण मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री रहीं। 1986 से 1987 तक श्रम मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री रहीं और 1987 से 1989 तक कल्याण मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री रहीं। उसके बाद वे 2 मई 1995 से 22 अप्रैल 1998 तक पांडिचेरी के लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में कार्य किया।

इस अवसर पर सुनील द्विवेदी पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सीएमपी , कृपा शंकर उपाध्याय, मधु चकहा, राजेश श्रीवास्तव, कन्हैया लाल गुप्ता, अमित शर्मा, मुहर्रम अली, प्रमोद आजाद, अनुपम मालवीय,भावना गौर ,सारिका शर्मा, टीटू गुप्ता, नवीन पटेल डॉ भावेश द्विवेदी, नवीन शर्मा, आदि लोग उपस्थित थे।

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