Friday, January 30Ujala LIve News
Shadow

पहली मोहर्रम,बिछ गई फर्श ए अज़ा-हो रही ज़िक्र ए शोहदा ए करबोबला

पहली मोहर्रम,बिछ गई फर्श ए अज़ा-हो रही ज़िक्र ए शोहदा ए करबोबला

माहे मोहर्रम की पहली को नवासा ए रसूल हज़रत इमाम हुसैन व अन्य 71 शहीदों की अज़ीम शहादत के चौदह सौ साल गुज़रने के बाद भी आज उस ज़िन्दा ओ जावेद को याद किया जा रहा है जिसने अपने नाना के दीन की अज़मत और बक़ा की खातिर हज को उमरे से बदल कर काबा जैसी पवित्र जगहा को खूंरेजी से महफूज़ कर करबला का रुख किया और अपने पुरे खानवादे और दोस्त अहबाब को राहें हक़ में क़ुरबान कर दिया।उसी अज़ीम कुर्बानी की याद मनाते हुए बख्शी बाज़ार इमामबाड़ा नाज़िर हुसैन में मजलिस को मौलाना आमिरुर रिज़वी ने खिताब करते हुए शहादत का ज़िक्र किया। सिलसिलेवार मजलिस की कड़ी में चक ज़ीरो रोड स्थित इमामबाड़ा डिप्यूटी ज़ाहिद हुसैन में दस दिवसीय अशरे की पहली मजलिस को मौलाना रज़ी हैदर रिज़वी ने खिताब किया।बख्शी बाज़ार से भोर में शुरु हुआ मजलिस का दौर छोटी चक ,गुड़मण्डी ,इमामबाड़ा वज़ीर जान ,मीरगंज , घंटाघर , सब्ज़ी मण्डी ,पत्थरगली , रानीमंडी करैली करैलाबाग़ शाहगंज दरियाबाद रौशनबाग़ सहित अन्य मोहल्लों में देर रात तक चलता रहा।वहीं दरियाबाद अज़ाखाना सैय्यद फरहत अली में पहली मोहर्रम की सालाना मजलिस हुई जिसमें रेयाज़ मिर्ज़ा व शुजा मिर्ज़ा ने पुरदर्द मर्सिया पढ़ा तो ज़ाकिरे अहलेबैत अशरफ अब्बास खां ने मजलिस को खिताब किया।बाद मजलिस इमाम हुसैन के वफादार घोड़े ज़ुलजनाह की शबीह निकाली गई।जिस पर लोगों ने अक़ीदत के फूल चढ़ा कर मन्नत व मुरादें मांगीं। अन्जुमन हाशिमया दरियाबाद के नौहाख्वानो ज़िया अब्बास अर्शी ,यासिर सिबतैन आदि ने डॉ क़मर आब्दी व आमिरुर रिज़वी का लिखा ग़मगीन नौहा पढ़ा।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *