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एनडीए के अध्यक्ष के राज में कई सभासद स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से नदारद

एनडीए के अध्यक्ष के राज में कई सभासद स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से नदारद

स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में नदारद दिखे आदर्श नगर पंचायत चोपन के 8-9 सभासद

बीजेपी के सभासद भी शामिल, नगर से लेकर मुख्यालय तक बना चर्चा का विषय

सोनभद्र| जनपद सोनभद्र के नगर पंचायत में कारनामा।
15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस जिसे राष्ट्रीय पर्व के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है और देश की जनता को इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है। सरकारी भवनों व विद्यालयों में देशभक्ति गीत बजते ही अंदर की राष्ट्रवाद जाग जाती है। लेकिन यहाँ एक सवाल वाजिब तौर से संदेह पैदा करती है। क्या राजनीति और रणनीतिकारों से आज भी देश की जनता आजाद हुई है। कोई भी बड़े पद पर आसीन होकर अपनी तुग़लकी फरमान को थोपने का प्रयास करते है। इसके लिए वो किसी भी हद तक जा सकते है। इसका जीती जागती बानगी देखने को मिली आदर्श नगर पंचायत चोपन में जहाँ स्वतंत्रता दिवस को धूम-धाम से मनाया जा रहा था। लेकिन जिम्मेदारों के माथे पर पसीना साफ देखा जा सकता था। दरसल नगर पंचायत के 8-9 सभासद नगर पंचायत के कार्यक्रम के दौरान नदारद दिखे। इसमे कई सभासद बीजेपी के भी बताये जा रहे है। नगर अध्यक्ष खुद एनडीए के प्रत्यासी के तौर पर चुने गए है। ऐसे में एनडीए में सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी के सभासद और अन्य सभासदों के नदारद होने की खबर नगर से लेकर जिले तक मे चर्चा का केंद्र बनी रही। सूत्रों द्वारा मिली खबर के अनुसार नगर अध्यक्ष के तुग़लकी बरताव से सभासद नाराज़ चल रहे है। अंदर खाने की बात तो खुलकर सामने नहीं आ पाई है फिर भी नगर पंचायत के कर्मचारियों का कहना है कि, पहली बोर्ड मीटिंग में ही नगर अध्यक्ष ने सभासदों को वो सम्मान नहीं दिया जिसका हकदार एक आम जनता भी होती है। लेकिन सभासदों को सभासद की बात तो छोड़िए उनको आम जनता वाली भी सम्मान नहीं दिया गया। दूसरी सबसे बड़ी वजह सामने आ रही है वो है वार्ड को चुन चुनकर काम देना। बिना टेंडर भरे ही कई कामों को अपने चहेते ठेकेदारों को दे देना और उसमें से कई काम ऐसे है जो बिल्कुल मानक के विपरीत हो रहे। जब इसकी शिकायत नगर अध्यक्ष से की गई तो उन्होंने साफ कहा कि आप के कहने से काम नहीं होगा। आप इसकी शिकायत कहि भी कर दीजिए हमे इससे लेना देना नहीं, हमारा काम है ठेका जारी करना। जब इस्टीमेट देने की बात सभासदों ने की तो अधिशाषी अधिकारी की तरफ से बोला गया कि जब हमें इस्टीमेट समझ मे नहीं आता तो आपलोगों को कहा से आएगा। अगर आपको इस्टीमेट चाहिए तो इसके लिए आप आरटीआई लगाइए आप सभासद है तो कोई भी कार्यलय की जानकारी हम ऐसे नहीं दे सकते। वैसे तो ये तय माना जाय कि नगर पंचायत का खर्चा कुछ है और दिखाया कुछ और जा रहा इस बात की भी जानकारी नगर कार्यालय द्वारा नहीं दी जाती।मैरिज हाल को भी नगर पंचायत कार्यालय की तरफ से बन्द कर दिया गया है। जहां गरीब बच्चें का पठन पाठन का कार्य बिना शुल्क के सामाजिक व्यक्ति द्वारा कराया जाता था। लेकिन नगर अध्यक्ष को ये भी नहीं सुहाता
एक बात तो तय है नगर पंचायत अध्यक्ष व अधिशाषी अधिकारी अपने मन से नगर पंचायत को चलाना चाहते है। हालांकि अपने मंसूबों में वो कामयाब हो पाते है कि नहीं ये देखने वाली बात होगी।

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