लेले अइहा बालम शिल्प मेलवा से चुनरी, न ता तरसा देहब सेजरिया से अंगुरी
लेले अइहा बालम शिल्प मेलवा से चुनरी, न ता तरसा देहब सेजरिया से अंगुरी
दीपावली शिल्प मेले में बुधवार की सुरमई शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें लोकगीत गायन, भजन, सुगम संगीत की प्रस्तुति कलाकारों के द्वारा शिल्प हाट के मुक्ताकाशी मंच पर किया गया। कार्यक्रम की शुरुवात प्रयागराज के लोकगीत गायक उदय चन्द्र परदेशी और उनके साथी कलाकारों ने हनुमत स्तुति कजरी से की इसके बाद उन्होंने ‘‘ लेले अइहा बालम शिल्प मेलवा से चुनरी ना त तरसा देहब हमहूं देखा देहव सेजरिया से अंगुरी एवं घर-घर जरी दीया देवरी के दिनवां प्रकाश पर्व आइल हो कातिक महिनवां गाकर श्रोताओं को खूब पसंद आया। संगीत के क्षेत्र में काफी नाम कमा चुकी लखनऊ से पधारी यामिनी पाण्डेय व कामिनी मिश्रा ने युगल में ‘‘ हमारे साथ रधुनाथ किस बात की चिंता एवं ऐसी मैं तो प्रेम दीवानी आज मेले में उड़ रही धूल मोहे प्यारी लागे भजन गाकर खूब ताल...






