अज़ादारी का सिलसिला जारी
*अज़ादारी का सिलसिला जारी*
*तेरी खुशीयों मे खुशी तेरे ग़म मे ग़म है*
*रुकने न देंगे कभी खाई यह क़सम है....मातमो बैन मौला मौला हुसैन मौला-मौला हुसैन मौला*
चौदह सौ साल पहले करबला के मैदान में हक़ और इन्सानियत की बक़ा के लिए शहीद हुए पैग़म्बरे इसलाम मोहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन व अन्य जाँनिसारों की याद मे दो माह और आठ दिनो तक ग़म मनाने का सिलसिला माहे मोहर्रम के चाँद के साथ शुरु हो कर माहे रबीउल अव्वल की आठवीं तक जारी रहता है।इसी सिलसिले मे शहर के विभिन्न इलाक़ो मे कहीं अशरा ए मजालिस तो कहीं एक दिवसीय सालाना मजलिसे हो रही हैं।सुलतानपुर भावा मे खाना ए आले मोहम्मद मे अशरे की आज चौथी मजलिस को लखनऊ के मौलाना हमीदुल हसन साहब क़िबला ने खेताब किया।मंज़रुल हिन्दी की सोज़ख्वानी से मजलिस का आग़ाज़ हुआ।वहीं बैदन टोला रज़ा मंज़िल मे हुई सालाना मजलिस को मौलाना सैय्यद जवादुल हैदर रिज़वी ने खिताब किया और अन्जु...









