मेरे राम

लेखिका जूही श्रीवास्तव
विशुद्धम परमं सच्चिदानंद रूपम
गुणाधाराम आधारहीनं वरणयं
महानतम विधांतम गुणांतम सुखानतं स्वयं रामम प्रपद्ये
स्वयं रामम प्रपद्ये
जो विशुद्ध सच्चिदानंद स्वरूप है
जो निराधार होते हुए भी समस्त गुणों के आधार है ,जो संसार मे श्रेष्ठ स्वयं प्रकाश स्वरूप है उन प्रभु श्री राम जी चरणों मे
नमन है ,नमन है ,नमन है ।
जिनकी कृपा से आज हमे पुनः राममय होने का सौभाग्य मिल रहा है । आज चहु ओर श्री राम के नाम की गूंज है और घर घर मे राम नाम की अलख जगी है ।
जन जन का मन राम के लिए तड़प रहा है और हर हृदय में राम के नाम का स्पंदन हो रहा है ।पृथ्वी ,आकाश ,प्रकृति,जीव सभी प्रभु श्री राम के जय घोष से आह्लादित हो रहे है और ऐसे दिव्य वातावरण में हमे सौभाग्य मिल रहा है प्रभु के मंदिर और प्राण प्रतिष्ठा के साक्षी बनने का ।
भारत का कण कण साक्षी है ,
जीवन का पल पल साक्षी है ।
तपस्थली जो ऋषि मुनियों की ,
कुटियों का तृण तृण साक्षी है ।
धरती और अनंत व्योम में ,
राम बसे है रोम रोम में ।
किसी ने बहुत सुंदर कहा है —
राम दवा है रोग नही है , सुन लेना
राम त्याग है भोग नही है, सुनलेना
राम छमा है क्रोध नही है ,सुनलेना
राम “सत्य” है “शोध”नही है सुनलेना ।
प्रभु श्री राम जन जन के कण्ठ हार है ,मन है ,प्राण है,सर्वस्व है ।
वो भारत के प्रतिरूप और भारत उनका प्रतिरूप
उन्ही से तो भारत अर्थ पाता है और जन — जीवन की सार्थकता को पाता है । वही तो भारत का पर्याय और भारत की आत्मा है।
मेरे राम तो निर्विकल्प है जिनका कोई विकल्प ही नही पूरी दुनिया मे । तभी तो एक विधर्मी भी चाहता है …
“राम जैसा पुत्र , “राम” जैसा व्यवहार
“राम” जैसा राज्य ,”राम” जैसा संस्कार
आज पूरी दुनिया की नज़रे अयोध्या पर आकर टिकी हुई है।आज इस राम मंदिर की लहर ने प्रभु श्री राम जी के नाम की गूंज को भारत ही नही अपितु सम्पूर्ण विश्व मे गुंजायमान कर दिया है।
ऐसा लग रहा है मानो सकारात्मकता आज नकारात्मकता को परास्त करने कदम भरने लगी है और सत्य असत्य को परास्त कर रहा है ।
धन्य है हम सब जो इस अदभुत ,अनुपम और दिव्य पलो के साक्षी बनेंगे और अपने जीवन को सार्थक ,सफल और अतुलनीय बनायेगे ।
सारा जग है प्रेरणा ,
प्रभाव सिर्फ राम है ।
भाव सूचिया बहुत है
भाव सिर्फ राम है ।।
!! सत्य सनातन धर्म की जय !!
