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“इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सम्बद्ध CMP डिग्री कॉलेज के विधि विभागाध्यक्ष को मिला राजभाषा गौरव पुरस्कार”*

 

“इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सम्बद्ध CMP डिग्री कॉलेज के विधि विभागाध्यक्ष को मिला राजभाषा गौरव पुरस्कार”*l

 

प्रो. (डॉ.) शिव शंकर सिंह को “राजभाषा गौरव पुरस्कार 2024” से नवाज़ा जाएगा

प्रयागराज की शैक्षणिक एवं विधिक जगत के लिए गौरव का क्षण है कि ख्यातिप्राप्त विधिवेत्ता, लेखक एवं शिक्षाविद् प्रो. (डॉ.) शिव शंकर सिंह को उनकी उल्लेखनीय पुस्तक “बौद्धिक सम्पदा अधिकार” के लिए भारत सरकार के राजभाषा विभाग द्वारा “राजभाषा गौरव पुरस्कार 2024” से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई है। उन्हें यह पुरस्कार “विधि” श्रेणी के अंतर्गत द्वितीय पुरस्कार के रूप में प्रदान किया जाएगा।

यह पुरस्कार उन्हें आगामी हिंदी दिवस समारोह 2025 एवं पांचवें अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के अवसर पर भव्य आयोजन के दौरान प्रदान किया जाएगा। यह दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 14 और 15 सितंबर, 2025 को महात्मा मंदिर कन्वेंशन एवं एग्ज़िबिशन सेंटर, गांधीनगर, गुजरात में आयोजित होगा। देशभर से आए विशिष्ट अतिथियों एवं विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति में प्रो. (डॉ.) सिंह को यह सम्मान मंचासीन गणमान्य व्यक्तियों द्वारा प्रदान किया जाएगा।

प्रो. (डॉ.) शिव शंकर सिंह वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सम्बद्ध सीएमपी डिग्री कॉलेज, प्रयागराज के विधि विभाग में विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। शिक्षण के साथ-साथ उन्होंने विधि क्षेत्र में हिंदी भाषा में मौलिक लेखन को विशेष बढ़ावा दिया है। उल्लेखनीय है कि प्रो. सिंह की विधि से संबंधित अब तक दस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें पाँच हिंदी भाषा में तथा पाँच अंग्रेजी भाषा में हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने अब तक 40 शोध पत्र भी विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाशित किए हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल प्रयागराज के लिए बल्कि पूरे विधि जगत और हिंदी साहित्य जगत के लिए भी गर्व का विषय है।

इस अवसर पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रो. (डॉ.) शिव शंकर सिंह ने कहा – “यह सम्मान मेरे लिए अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है। यह पुरस्कार केवल मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि मेरे विद्यार्थियों, सहकर्मियों और उन सभी के सहयोग का परिणाम है जिन्होंने सदैव मुझे प्रेरित किया। हिंदी में विधि संबंधी लेखन को प्रोत्साहित करना मेरा दायित्व है और यह सम्मान मुझे और अधिक जिम्मेदारी का अहसास कराता है।”

गौरतलब है कि राजभाषा गौरव पुरस्कार प्रतिवर्ष उन लेखकों, विद्वानों और शोधकर्ताओं को दिया जाता है जिन्होंने हिंदी भाषा में मौलिक लेखन कर विभिन्न विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान किया हो। इस सम्मान की घोषणा से प्रयागराज के शैक्षणिक जगत एवं विधि संकाय से जुड़े शिक्षकों और विद्यार्थियों में हर्ष की लहर है।

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