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लघु कथा के लिए मांगी लाल शर्मा हुए सम्मानित

लघु कथा के लिए मांगी लाल शर्मा हुए सम्मानित

 

लघु कथा…. शाहिद

 

एक तरफ झुग्गी झोपड़ियां थी, बीच में सड़क , और उस तरफ बच्चों का स्कूल। झोपड़िया के बाहर बच्चा खेल रहा था, उसकी उम्र 10 वर्ष के लगभग थी, तभी स्कूल से राष्ट्रगान आने की आवाज आई, बच्चा सावधान की मुद्रा में खड़ा हो गया। तभी झोपड़ियां के पास से एक बच्चा बसता लटकाए लड़का आता हुआ नजर आया । उसे स्कूल जाने में शायद देर हो गई थी इसलिए वह जल्दी-जल्दी चल रहा था। जिसकी उम्र लगभग 8 साल थी जल्दी-सड़क के किनारे पहुंचा, , झुग्गी झोपड़ी के बाहर खेलते बच्चे की तीव्र चली आ रही ट्रक पर नजर पड़ी। बच्चा हवा की गति से तेज दौड़ा और स्कूल जाते हुए उस बच्चे को धक्का देकर रोड की उस तरफ फेक सा दिया । मगर वह गरीब का बच्चा अपने आप को बचा न सका। तेज ट्रक उसके ऊपर से गुजर गई, वह स्कूल जाने वाला बच्चा उठा और अपने कपड़े जटकता हुआ स्कूल की तरफ चल दिया। जुगी झोपड़ियां से मर्द और औरतें निकल कर वहां जमा हो गई, सब तरफ से रोने की आवाज आने लगी, वह बच्चा दम तोड़ चुका था। उस गरीब बच्चे का नाम कहीं भी इतिहास में नहीं आएगा। मगर मेरी नजर में वह है एक शहीद था, एक बड़े घर के बच्चे को बचाने के लिए उसने अपनी शहादत दी।

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