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रानी रेवती देवी में वंदे मातरम राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने पर सस्वर गायन किया गया

रानी रेवती देवी में वंदे मातरम राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने पर सस्वर गायन किया गया

इसी गीत ने आजादी के संघर्ष में लाखों देशवासियों को नई ऊर्जा प्रदान की थी- बांके बिहारी पाण्डेय

प्रयागराज  विद्या भारती से संबद्ध काशी प्रांत के रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज राजापुर प्रयागराज में प्रधानाचार्य बांके बिहारी पाण्डेय के नेतृत्व में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर वंदना सभा में भैया बहनों ने संगीताचार्य मनोज गुप्ता के संगीत निर्देशन में सस्वर एवं लयबद्ध वंदे मातरम का गायन सामूहिक रूप से किया l
इस अवसर पर प्रधानाचार्य बांके बिहारी पाण्डेय ने भैया बहनों को संबोधित करते हुए बताया कि देश के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को 150 वर्ष पूरे हो गये हैं। 7 नवंबर 1875 को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखी गई यह रचना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा बन गई थी। यह गीत केवल एक कविता नहीं, बल्कि भारत की एकता, त्याग और मातृभूमि के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। इसी गीत ने आजादी के संघर्ष में लाखों देशवासियों को नई ऊर्जा दी थी। उन्होंने बताया कि
‘वंदे मातरम’ को पहली बार 1875 में बंगदर्शन पत्रिका में प्रकाशित किया गया था। सन् 1882 में इसे बंकिम चंद्र की प्रसिद्ध कृति आनंदमठ में शामिल किया गया। वहीं, इस गीत को संगीत में ढालने का काम रवींद्रनाथ टैगोर ने किया। 1896 में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में यह गीत पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया गया। सात अगस्त 1905 को इसे पहली बार राजनीतिक नारे के रूप में इस्तेमाल किया गया, जब बंगाल विभाजन के विरोध में लोग सड़कों पर उतरे थे।
कार्यक्रम का कुशल एवं सफल संचालन सत्य प्रकाश पाण्डेय ने किया l

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