दारियाबाद में क़दीमी जंजीरो का मातम

मोहर्रम की पांच तारीख़ को इलाहाबाद के तमाम मुस्लिम बाहुल्य इलाक़ो में अज़ादारी मजलिस व मातम और ताजियादारी अपने चरम पर है इसी सिलसिले में दारियाबाद में इमामबाड़ा गुलज़ार अली खान में एक मजलिस का आयोजन किया गया जिसको ज़ाकिर ए अहलेबैत रज़ा हसनैन साहब ने खेताब किया और बताया इमाम हुसैन ने नेकी के रास्ते पर चलने के लिए अपनी शहादत दी और आज उन्ही के ज्ञान का प्रकाश सारे संसार मे फैला हुआ है।
इसके बाद मशहूर अंजुमन, अंजुमन ए हाशिमिया ने अपने नए कलाम पढ़े जिससे लोगो की आंखें नम हो गई।संचालक ज़ौरेज़ हैदर ने बताया कि साहिबे ब्याज डेज़ी,अर्शी,फ़ैज़ी,नज़र अली,अब्बास,यासिर,ख़ुशतर ने पढ़ा”शाम ए ग़रीबा आ गई सर पर ज़ैनब है तन्हाई है
कोई नहीं है मोनिस ओ यावर ज़ैनब है तकन्हाई है”और “खाक़ पर हाय ग़ज़ब अहले हरम बैठे हैं।अपनी आंखों को किये अश्को से नम किये बैठे हैं”इसके फौरन बाद जंजीरो से पहुश्ज़नी हुई जिससे वहां मौजूद सभी लोग या हुसैन कहकर रोने लगे।महिलाओं ने मातम कर के पुरसा पेश किया बाद में सेक्रेटरी मशद अली खान ने सभी श्रदालुओ का शुक्रिया अदा किया कार्यक्रम में आग़ा सरदार खान,कैसर सिबतेंन,यसा,काज़िम साहब,रानू,शाहनवाज़ खान,शानदार,दानिश आदि उपस्थित रहे।
