त्वचा दान कर औरों की जिंदगी में खुशियां भर सकते हैँ आप

मुंबई. भारत विकास परिषद् की दहिसर शक्ति शाखा ने आनंद नगर दहिसर स्थित स्वामीनारायण मंदिर परिसर में मंदिर के प्रवचन सभा के बीच त्वचा दान के जरुरत और इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
त्वचादान के बारे में नेशनल बर्न्स सेण्टर से हर्ष गायकवाड़ ने PPT प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया की त्वचा दान मरने के बाद 4 से 6 घंटे के बीच किया जा सकता है। इसके लिए पीठ, जांघ और पैरों सी थोड़ी थोड़ी त्वचा निकाली जाती है। उन्होंने बताया की त्वचा निकलने के पश्चात् उसको त्वचा बैंक में ले जाया जाता है जहां उसको प्रोसेस करने के पश्चात् ग्लिसरीन में रखा जाता है और इस तरह त्वचा को 5 साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
भारत विकास परिषद् के अध्यक्ष राजेश मोदी ने बताया की हर साल 140000 लोग जलने से मरते हैं। यदि दूसरे शब्दों में कहे तो हर 4 मिनट में एक व्यक्ति की मृत्यु जलने से होती है। परन्तु इन लोगो का जीवन बचाया जा सकता है यदि इन्हे समय पर दान की हुई त्वचा मिल जाये तो। परन्तु ये हमारा दुर्भाग्य है की लोगो को पता ही नहीं है की त्वचा का भी दान होता है। उन्होंने बताया की हमारी संस्था ने समाज में त्वचा दान जागरूकता का अभियान चलाया है।
भारत विकास परिषद् के उपाध्यक्ष डानी खंडेलवाल ने कहा की त्वचा दान से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है क्युकी ये मरने के बाद ही किया जा सकता है, दूसरा इसमें बहुत ही काम मात्रा में त्वचा ली जाती है जिस से ना तो खून निकलता है और ना ही शरीर में कोई विकृति आती है।
भारत विकास परिषद् की ही सदस्या सुनीता मोराजकर ने बताया कि हमारी संस्था ने समाज में त्वचा दान जागरूकता का अभियान चलाया है।
मदिर के स्वामी जी ने अपने प्रवचन में बताया कि दान बहुत प्रकार का होता है, जैसे अन्न का दान, ज्ञान का दान आदि। परन्तु अपने अंगो का दान महँ दान कि श्रेणी में आता है क्युकी यह किसी को जीवन देता है। उन्होंने भारत विकास परिषद् के सदस्यों को एक नेक कार्य के लिए शुभकामनायें दी और तुलसी कि माला से सदस्यों का स्वागत किया।
