विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत और लेटरेरी क्लब के द्वारा विश्व हिन्दी दिवस का हुआ भव्य आयोजन
प्रयागराज विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत और लेटरेरी क्लब
(इलाहाबादी साहित्यिक अड्डा) के द्वारा विश्व हिन्दी दिवस का आयोजन किया जिसमें विश्व जनचेतन ट्रस्ट के उपाध्यक्ष डॉ. राहुल शुक्ला और लेटरेरी क्लब के सचिव डॉ. प्रदीप चित्रांशी मुख्य वक्ता रहे.

भारत, भाषाओं का एक कुम्भ है जिसमें अमृत की तरह कई भाषाएँ विद्यमान है। जो सामूहिक चेतना और आध्यात्मिक ज्ञान के लिए शक्तिशाली प्रतीक है तथा मानव को मानव से जोड़कर जीवन के उच्च उद्देश्य के लिए प्रेरित करती हैं। इस अमृत अमृत भरे कुम्भ में अनेक विदेशी भाषाएँ समय -समय अपनी चेतना को जाग्रत करने के लिए प्रवेश करती रहती हैं। इन्हीं भाषाओं में अंग्रेजी भाषा भी इस है। इस भाषा ने अन्य भाषाओं पर अपना प्रभुत्व जमाकर भाषाओं की दुनिया में अपना राज्य स्थापित करने की दिशा में बढ़ने लगी लेकिन वह यह भूल गई कि भारत सूफी -संतो ने जैसे सूफियों को स्वीकार किया है, वैसे ही इसे स्वीकार कर वैसे ही ऐसे ऐसे स्वीकार कर और स्वयं हिंदी के रूप में संपर्क भाषा बन लोगों की जुबान बन गई।
भारतवासियों की जुबान बनने की यात्रा 14 सितंबर सन 1949 को संविधान सभा से शुरू हुई जहां इसे देवनागरी लिपि हिंदी के रूप में स्वीकारा गया तथा 1953 में इसके प्रचार प्रसार हेतु पहली बार 14 सितंबर में हिंदी दिवस के रूप में मनाया गया। देश में इसकी स्वीकार्यता बढ़ी लेकिन वैश्विक स्तर पर कैसे ले जाएँ जिससे वहाँ के भाषण कुंभ में इसका भी संगम रहे। इस कार्य को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1975 में महाराष्ट्र के नागपुर शहर में विश्व हिंदी सम्मेलन के जरिए नींव की पहली ईंट रखी। इसी क्रम में 1947 में पंडित अटल बिहारी वाजपेई ने संयुक्त राष्ट्र संघ में आयोजित कार्यक्रम में भाषण देकर इसे आगे बढ़ने का काम किया 10 जनवरी 2006 में मनमोहन सिंह जी ने इसे प्रति वर्ष मनाने का फैसला लिया। उनके इस फैसले में भाषाई कुंभ में गंगा जमुना के संगम पर जिस तरह का पानी दिखता है इस तरह से वैश्विक स्तर पर हिंदी अन्य भाषाओं के साथ दिखने लगी वैश्विक भाषाई संगम में हिंदी के ज्ञान का प्रकाश एक शक्तिशाली प्रतीक बनकर भाषा के उद्देश्य को पूर्ण करता रहे इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए विश्व हिंदी दिवस प्रतिवर्ष मानते हैं।

डॉ. प्रदीप कुमार चित्रांशी
विश्व हिन्दी दिवस : शुभकामना संदेश
हिन्दी केवल हमारी अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि हमारी आत्मा की भाषा है।
हमारा दृढ़ विश्वास है कि जब मीडिया हिन्दी में ईमानदारी, संवेदनशीलता और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ संवाद करता है, तब समाज में जागरूकता, एकता और मूल्यबोध का व्यापक विस्तार होता है। यही कारण है कि विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत हिन्दी के माध्यम से रचनात्मक पत्रकारिता, साहित्यिक अभिव्यक्ति एवं सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने हेतु सतत प्रतिबद्ध है।
आइए, इस विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर हम यह संकल्प लें कि—
• मीडिया, साहित्य और सामाजिक संवाद में हिन्दी को प्राथमिकता देंगे,
• युवा पीढ़ी को हिन्दी के प्रति गर्व, सम्मान और आत्मीयता से जोड़ेंगे,
• भाषा के माध्यम से राष्ट्र, संस्कृति और मानवता की सेवा करेंगे।
हिन्दी से ही चेतना है,
हिन्दी से ही संवेदना है।
इन्हीं शुभ भावनाओं के साथ,
आप सभी को विश्व हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।

साकिब सिद्दीकी ‘बादल’,राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी,विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत
विश्व हिन्दी दिवस 2026 : संदेश
हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय अस्मिता और वैश्विक संवाद की सशक्त सेतु है।
विश्व हिन्दी दिवस 2026 के पावन अवसर पर, विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में मैं समस्त देशवासियों एवं हिन्दी-प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ।
हिन्दी वह भाषा है जो लोक से लोक तक, जन-जन की भावना से जुड़कर विचार, संवेदना और संस्कार का संचार करती है। आज जब विश्व एक वैश्विक ग्राम बन चुका है, ऐसे समय में हिन्दी ने अपनी सरलता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा और भावनात्मक गहराई के कारण अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है।
विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत की प्रस्तावना के अनुरूप हमारा विश्वास है कि— भाषा, साहित्य और संस्कृति किसी भी समाज की चेतना का मूल आधार होते हैं। इसी चेतना को जाग्रत करना, साहित्यकारों, रचनाकारों, युवाओं और समाज के हर वर्ग को हिन्दी से जोड़ना तथा मानवीय मूल्यों, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक राष्ट्रबोध को सुदृढ़ करना हमारे संगठन का प्रमुख उद्देश्य है।
ट्रस्ट निरंतर हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार, साहित्यिक गतिविधियों, सांस्कृतिक आयोजनों और सामाजिक चेतना से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से हिन्दी को जन-आंदोलन का स्वरूप देने हेतु संकल्पित है। हम मानते हैं कि हिन्दी में सोच, हिन्दी में संवाद और हिन्दी में सृजन ही सशक्त भारत की आधारशिला है।
आइए, विश्व हिन्दी दिवस पर हम सब यह संकल्प लें कि—
हिन्दी का सम्मान केवल दिवस विशेष तक सीमित न रहे, अपने व्यवहार, कार्यक्षेत्र और डिजिटल माध्यमों में हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करें,
नई पीढ़ी को हिन्दी भाषा, साहित्य और संस्कृति से जोड़ें।
हिन्दी है तो पहचान है,
हिन्दी है तो स्वाभिमान है।
इन्हीं भावनाओं के साथ,
मैं एक बार पुनः सभी को विश्व हिन्दी दिवस की शुभकामनाएँ देता हूँ।
जय हिन्दी, जय भारत।

डॉ. राहुल शुक्ल ‘साहिल’,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत

दीप किशन कनौजिया
प्रदेश उपाध्यक्ष – युवा चेतना शक्ति
हिंदी से जुड़ा स्वाभिमान, हिंदी से पहचान,
युवाओं की चेतना में बसता भारत का अभिमान।

प्रीति श्रीवास्तव
जिला अध्यक्ष – सांस्कृतिक चेतना शक्ति
हिंदी में संस्कृति की सुगंध, संस्कारों का मान,
हिंदी से ही जीवित रहती हमारी सांस्कृतिक पहचान।
विश्व हिंदी दिवस
आज विश्व हिंदी दिवस मनाया जा रहा है। यूं तो इसकी शुरुआत 10 जनवरी 1975 को नागपुर में हुई थी और विश्व के अन्य देशों दूतावासों में नियमित रूप से मनाया जाता रहा है परन्तु अपने देश में वर्ष से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी के कार्यकाल में 2006 से नियमित रूप मनाने का निर्णय लिया गया। इसी परिप्रेक्ष्य में 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस अब नियमित मनाया जाता है। इसे मनाने के पीछे उद्देश्य यह है कि विश्व में हिंदी का विस्तार हो।यहां यह भी ध्यातव्य है कि हिन्दी विश्व की सबसे वैज्ञानिक भाषा है लेकिन इसे वह मान नहीं मिला जिसकी यह अधिकारिणी है। इसी दिशा में आगे भी काम करने की आवश्यकता है। आज क्रत्रिम मेधा के युग में इसकी सहायता से हिंदी का तीव्रतर विकास हो सकता है अत: हमें इस दिशा में भी कार्य करना चाहिए और हिंदी को विश्व में इसका उचित स्थान दिलाने के लिये प्रयत्नशील रहना चाहिए।

शरत् चन्द्र श्रीवास्तव ‘सरल’
वार्षिट गीतकार

हिंदी को विश्व पटल पर ले जाने और समृद्धशाली बनाने की सबसे अधिक जिम्मेदारी साहित्यकारों की है।
आज हिन्दी विश्व की एक स्वाभाविक भाषा है। इसके प्रयोग करने वाले सिर्फ इसे गति प्रदान करें। व्यापार और रोजगार में आ जाने से इसकी प्रगति स्वतः हो जाएगी।”

राकेश मालवीय, मुस्कान
