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दरबार-ए-सफ़वी में 39वां सालाना उर्स रूहानी माहौल में हुआ मुकम्मल

दरबार-ए-सफ़वी में 39वां सालाना उर्स रूहानी माहौल में हुआ मुकम्मल

कुरआनख्वानी, चादरपोशी, महफ़िल-ए-समा में शामिल हुए अकीदतमंद

 


प्रयागराज। शहर के कदीमी रूहानी मरकज़ दरबार-ए-सफ़वी, शाहगंज में बुधवार, 3 जून को 39वां सालाना उर्स शरीफ पूरी अकीदत, एहतराम और रूहानी कैफियत के साथ मुकम्मल हुआ। उर्स के मौके पर दिनभर विभिन्न दीनी व रूहानी रस्मों का सिलसिला जारी रहा, जिसमें शहर समेत दूर-दराज़ इलाकों से आए बड़ी तादाद में अकीदतमंदों ने शिरकत कर अपनी अकीदत का इज़हार किया।

यह सालाना उर्स हज़रत मौलाना मुश्फिद्दीन क़िबला महबूब उल्लाह शाह अलमारूफ़ हकीम मोहम्मद हामिद रहमतुल्लाह अलैह की याद में मनाया जाता है। उर्स की इब्तिदा नमाज़-ए-फ़ज्र के बाद कुरआनख्वानी, फ़ातिहाख्वानी और दुआएं ख़ैर से हुई।

सुबह लगभग 9 बजे दरगाह परिसर स्थित पुराना काला डांडा में अकीदतमंदों की मौजूदगी में ग़ुस्ल और चादरपोशी की रस्म अदा की गई। इसके बाद दरगाह पर हाज़िरी देने वालों का सिलसिला दिनभर जारी रहा।

उर्स के अहम मरहले के तौर पर नमाज़-ए-ज़ोहर के बाद महफ़िल-ए-समा का आयोजन किया गया, जिसमें सूफियाना कलाम और मनकबतों के जरिए रूहानी माहौल पैदा हुआ। इसके बाद शाम 3 बजकर 55 मिनट पर कुल शरीफ और फ़ातिहा की रस्म अदा की गई तथा मुल्क में अमन, भाईचारे, तरक्की और इंसानियत की भलाई के लिए ख़ुसूसी दुआएं की गईं।

उर्स की तमाम रसूमात दरबार-ए-सफ़वी के सज्जादानशीन अलहाज हकीम रिज़वान हामिद सफ़वी की सरपरस्ती में संपन्न हुईं। कुल शरीफ के बाद जायरीन और अकीदतमंदों में लंगर-ए-आम और तबर्रुक तकसीम किया गया।

इस मौके पर विभिन्न खानकाहों के सज्जादानशीन, उलेमा-ए-किराम, मुरीदीन मोहम्मद महबूब (डाबर)मोहम्मद अकरम और बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे तथा दरगाह परिसर देर शाम तक रौनक और रूहानियत से सराबोर रहा।

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