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कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में मुक्त विश्वविद्यालय ने निकाली तिरंगा यात्रा

कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में मुक्त विश्वविद्यालय ने निकाली तिरंगा यात्रा

अक्षयवट की तरह अक्षय है देश की रक्षा का जज्बा- कर्नल माहिम


प्रयागराज
कारगिल युद्ध में भारत की विजय की 27वीं वर्षगांठ कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में सोमवार को देशभक्ति और शौर्य का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम के नेतृत्व में विश्वविद्यालय के गंगा परिसर से तिरंगा यात्रा निकाली गई। यह यात्रा देशभक्ति के नारों के साथ शांतिपुरम होते हुए सरस्वती परिसर में समाप्त हुई। कारगिल शहीदों की स्मृति में तिरंगा यात्रा में शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं हाथों में तिरंगा लेकर कारगिल शहीदों की स्मृति को नमन कर रहे थे। तिरंगा यात्रा के पश्चात विश्वविद्यालय के तिलक सभागार में कारगिल शहीदों की स्मृति में व्याख्यान आयोजित किया गया। इस अवसर पर कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी और उनकी वीरता को याद किया गया।।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता कर्नल माहिम शर्मा, कमांडेंट, ओ डी फोर्ट प्रयागराज ने कहा कि एक सैनिक अपने देश के सम्मान के लिए जीवन त्याग देने के बारे मे बिलकुल नहीं सोचता। हम सभी भाग्यशाली हैं कि अपने प्रयागराज में अक्षयवट है। यह अक्षय क्यों है। क्यूंकि इसकी जड़ें मिट्टी के अंदर जड़ित है। वैसे ही आज हमारे सैनिकों का जज़्बा पूर्ण रूप से देश की रक्षा हेतु अक्षय है।
अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि फ़ौज एक सम्मानजनक सेवा है क्योकि सैनिकों के अंदर भारत माता के प्रति प्रेम है। हमें संकीर्ण विचारों से ऊपर उठना चाहिए । अगर हमरी सेना अक्षय वट की तरह है, तो हम अध्यापकों को छात्रों के अंदर देश प्रेम की भावना का संचार करना चाहिए चाहिए। कुलपति ने कहा कि आज का दिन केवल विजय का नहीं सिंहवालोकन करने का भी दिन है।
विशिष्ट अतिथि मुक्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव कर्नल विनय कुमार ने कहा कि वर्ष 1999 में हमारे वीर जवानों ने ऑपरेशन विजय के तहत कारगिल की दुर्गम चोटियों से घुसपैठियों को खदेड़कर तिरंगे की शान बढ़ाई थी। यह दिन हमें उन वीरों की याद दिलाता है जिन्होंने बर्फीली पहाड़ियों पर लड़कर देश की एक-एक इंच जमीन वापस ली। कारगिल युद्ध हमें सिखाता है कि देश की रक्षा के लिए त्याग, साहस और एकता कितनी जरूरी है। हमारे सैनिकों ने विषम परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। यही सच्ची देशभक्ति है।
समारोह के समन्वयक प्रोफेसर एस कुमार ने मंचासीन अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं का स्वागत किया। आयोजन सचिव डॉ राजेश सिंह ने संयोजन, डॉ त्रिविक्रम तिवारी ने संचालन तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर आनन्दानंद त्रिपाठी ने किया।

 

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