तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न
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रि-पुनर्स्थापन वन अनुसंधान केन्द्र, प्रयागराज में विभिन्न शासकीय सेवाओं के कर्मिकों हेतु भारत सरकार, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा प्रायोजित आजीविका सृजन के लिए अल्प ज्ञात फलों का मूल्यवर्धन विषय पर चल रहे तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में वैज्ञानिकों एवं प्रशिक्षणार्थियों के मध्य संवाद कार्यक्रम में बोलते हुए केन्द्र प्रमुख डा० संजय सिंह ने कहा अल्प ज्ञात फलों के द्वारा आजीविका सृजन के अवसर बढ़ाने की दिशा में व्यापक प्रयास किये जाने की आवश्यकता है। इसके पूर्व कार्यक्रम समन्वयक डा० अनीता तोमर, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए अल्प ज्ञात फलों के पौधों की पौधशाला तकनीकों के अंतर्गत विभिन्न पौधों के बीजों के संकलन का उपयुक्त समय तथा रख-रखाव से अवगत कुराया। डा० जी० एस० तोमर, अध्यक्ष, विश्व आयुर्वेद मिशन ने अल्प ज्ञात फलों की चिकित्सीय क्षमता पर चर्चा करते हुए आयुर्वेद के क्षेत्र में मनुष्यों को विभिन्न बीमारियों से निजात दिलाने में इन फलों को बहुत ही महत्वपूर्ण बताया। डॉ तोमर ने अपने उद्वोधन में आँवला, करोंदा, जामुन, बेल, केंथ एवं बेर के चिकित्सीय गुणों पर विस्तार से प्रकाश डाला । डा० हेमन्त कुमार, शुआट्स ने अल्प ज्ञात फलों के अंतर्गत सहजन की खेती तथा इसके मूल्यवर्धन की तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे बहुपयोगी बताया। डा० बी० एस० राजपूत, बांदा कृषि विश्वविद्यालय, बांदा ने आजीविका सृजन हेतु अल्प ज्ञात फलों के वृक्षों के मूल्यवर्धन पर चर्चा करते हुए बेल, अमरूद तथा महुआ आदि विभिन्न फलों की किस्मों पर चर्चा की साथ ही यह भी बताया कि वर्तमान में यह अपनी पहचान खोते जा रहे हैं। डॉ० आनंद, विस्तार निदेशक ने महुआ तेल की उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा की।कार्यक्रम में उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों ने अल्प ज्ञात फलों को तैयार करने, उनके रख-रखाव तथा उत्पाद बनाने की विधियों पर विस्तृत जानकारी प्राप्त किया साथ ही उससे सम्बन्धित अन्य जानकारियों को भी विशेषज्ञों से प्रश्नोत्तर के माध्यम से प्राप्त किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अन्य सेवाओं के 40 कर्मिकों को विभिन्न अल्प ज्ञात फलों के अंतर्गत आने वाले फलों के बारे में जानकारी दी गयी साथ ही विभिन्न संस्थानों के भ्रमण द्वारा इन फलों के उत्पादों को तैयार करने की विधियों से भी अवगत कराया गया। केन्द्र द्वारा अल्प ज्ञात फलों के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों को आजीविका एवं चिकित्सा के क्षेत्र में मार्ग प्रशस्त कराया गया। कार्यक्रम के अन्त में वरिष्ठ वैज्ञानिक आलोक यादव द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को धन्यवाद ज्ञापन किया गया। केन्द्र प्रमुख डॉ० संजय सिंह द्वारा प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में केन्द्र की विभिन्न परियोजनाओं में कार्यरत शोधार्थी यथा सत्यव्रत सिंह, बिजय सिंह, कुo ब्यूटी, स्वाति प्रिया, योगेश अग्रवाल, मोहया पाल, नरेश कलोत्रा आदि मौजूद रहे।
