मोटा अनाज एवं हमारा स्वास्थ्य विषय पर संगोष्ठी हुई आयोजित

रिपोर्ट:अनुराग अस्थाना
बीमारियों से बचाव के लिए भोजन में करें मोटे अनाज का प्रयोग- डॉ जी सी त्रिपाठी
“मोटा अनाज एवं हमारा स्वास्थ्य” विषय पर वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन सोमवार 16 जनवरी को माघ मेला में काली मार्ग स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में किया गया।
वर्ष 2023 इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स के रूप में मनाया जा रहा है।
आयुर्वेद विभाग उत्तर प्रदेश, विश्व आयुर्वेद मिशन एवं पारि पुनर्स्थापन वन अनुसंधान केंद्र प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को मोटे अनाज के विषय में जागरूक किया गया। भगवान धन्वंतरि की चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि प्रोफेसर जी सी त्रिपाठी अध्यक्ष उच्च शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश ने कहा कि भोजन में खनिज लवण एवं डाइटरी फाइबर की अपर्याप्त मात्रा के कारण ही मधुमेह एनीमिया उच्च रक्तचाप कैल्शियम की कमी हृदय एवं गुर्दे की बीमारी लगातार बढ़ रही है। मोटे अनाज में मौजूद पोषण एवं औषधीय गुणों के आधार पर इन्हें भविष्य के भोजन के रूप में देखा जा रहा है।
विश्व आयुर्वेद मिशन के अध्यक्ष प्रो (डॉ) जी एस तोमर ने बताया कि जीवन शैली संबंधित रोगों से बचाव, खाद्य सुरक्षा और पोषण की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है । सरकार ने इस वर्ष को इंटरनेशनल मिलेट ईयर घोषित किया है । बढ़ती आबादी खासतौर पर युवाओं व बच्चों को पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने और मधुमेह कैंसर हृदय रोग उच्च रक्तचाप आदि जीवन शैली से संबंधित बीमारियों की रोकथाम में मोटे अनाजों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
पारि पुनर्स्थापन वन अनुसंधान केंद्र प्रयागराज के निदेशक डॉ संजय सिंह ने कहा कि
मोटे अनाज के क्षेत्र में भारत के पास बेहतर अवसर है क्यूँकि यहाँ इनकी पर्याप्त जैवविविधता विद्यमान है।मोटे अनाज के कृषिवानिकी मॉडल विकसित करने के साथ इनसे बनने वाले भोज्य उत्पादों का निर्माण और मूल्य वर्धन किये जाने की आवश्यकता है जिससे किसानों और उद्यमियों दोनों को लाभ होगा।
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी प्रयागराज डॉ शारदा प्रसाद ने कहा कि आयुर्वेद में मिलेट्स के विषय मे विस्तार से बताया गया है।आज जनमानस में मिलेट्स के औषधीय गुणों को बताना आवश्यक हो गया है।कोरोना काल ने हमे अपनी जड़ों से जोड़ा है।आधुनिकीकरण ने हमे मोटे अनाज से दूर किया है पर आज मोटे अनाज की डिमांड बढ़ रही है।
मोटे अनाज के फायदे के विषय में विस्तार पूर्वक बताते हुए डॉ केडी पांडेय ने कहा कि गेहूं व चावल की तुलना में मोटे अनाज सस्ते होते हैं इनमें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इनके प्रयोग से पाचन तंत्र भी दुरुस्त रहता है। विशिष्ट अतिथि मा शारदा हॉस्पिटल के निदेशक डॉ आर के अग्रवाल ने बताया कि
गेहूं और चावल की तुलना में मोटे अनाजों में मिनरल्स विटामिंस एंड फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता है मोटे अनाज में बीटा कैरोटीन, नियासिन विटामिन B6 फोलिक एसिड पोटैशियम मैग्निशियम जिंक आदि खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। मोटे अनाजों में ज्वार बाजरा रागी कोदो सामा आदि शामिल हैं।
आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने वाले प्रगतिशील कृषक श्री बी डी सिंह ने कहा कि भारत में लगभग 17 मिलियन हेक्टेयर में मोटा अनाज उगाया जाता है जो कि 18 मिलियन के वार्षिक उत्पादन के साथ देश के सकल अन्य भंडार का 10% है। वैज्ञानिक डॉ अनीता तोमर ने बताया कि
ज्वार बाजरा रागी व मक्का जैसे महत्वपूर्ण अनाज गर्भवती महिला को देने से उसमें रक्तचाप एवं प्री एकलैंपशिया की घटना में कमी आती है। गर्भावस्था में बाहर से आयरन एवं कैल्शियम देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
डॉ अवनीश पाण्डेय ने बताया कि आज पूरा विश्व मोटे अनाज की ओर लौट रहा है। हम यह प्रण करें कि अपनी पसंद, बजट एवं उपलब्धता के आधार पर अनाज उपभोग का 25% मोटा अनाज सेवन करें।
डॉ कुमुद दूबे ने कहा कि प्राचीन काल से ही मेलेट्स एग्रीकल्चर, कल्चर एवं सिविलाइजेशन का हिस्सा रहे हैं हम सबको मिलकर इस जन आंदोलन को बढ़ाना है देश के लोगों में मिलेट्स के प्रति जागरूकता लाना है।
डॉ श्वेता सिंह ने कहा कि हमे नई पीढ़ी को मिलेट्स की जानकारी देना होगा।
आज मोटे अनाज का दिन लौट आया है गरीबों की थाली का भोजन यानी मोटा अनाज बढ़िया पैकेट में बंद होकर मॉल एवं किराना स्टोर पर प्रीमियम कीमतों पर बिक रहे हैं।
डॉ राजेश मौर्य, डॉ गोविंद राम पयासी, डॉ भरत नायक, डॉ बी एस रघुवंशी, डा खुशनुमा परवीन, डॉ दीपक सोनी ने अपने विचार रखे।
धन्यवाद ज्ञापन डॉ राजेन्द्र कुमार एवं कार्यक्रम का संचालन डॉ अवनीश पाण्डेय ने किया।
कार्यक्रम में डॉ आर के सिंह डॉ रविंद्र सिंह डॉ एसडी शुक्ला डॉ सुमन डॉ अशोक कुशवाहा डॉ किरण कुमार मौर्य डॉ जयप्रकाश डॉ अशोक प्रियदर्शी डॉ हेमंत सिंह, डा भरत नायक, डा खुशनुमा परवीन, डॉ ज्योतिर्मय, डॉ अमित पाण्डेय, डॉ राजेंद्र कुमार डॉ दीपक सोनी डॉ राजेश मौर्य, अनुराग अस्थाना, मुक्तेश शुक्ल, डॉ आशीष कुमार, निशांत, डॉ शशांक द्विवेदी, सतीश चंद्र दुबे, कल्पवासी एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।
