आज आदि शंकराचार्य के अभियान को आगे बढ़ाने की जरूरत है: शंकराचार्य अधोक्षजानंद देवतीर्थ

रिपोर्ट:आचार्य श्री कांत शास्त्री
इस तरह के आयोजन पूरे देश में होंगे और गुरुकुल की स्थापना की जायेगी
‘सनातन ज्ञान परंपरा और संस्कृत‘ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
प्रयागराज, (सं.वि.स.)। गोवर्धनपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने कहा कि भगवान आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र के बीच जो शास्त्रार्थ हुआ था, वह सनातन धर्म के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। भगवान शिव सनातन धर्म के उद्धार के लिए आदि शंकराचार्य के रूप में धरती पर आये। उन्होंने धर्म ध्वजा उठाकर भारत को अखंड बनाने का संकल्प लिया। मंडन मिश्र आदि विद्वानों ने दीक्षा लेकर आदिगुरु के अभियान केा आगे बढ़ाया। आज उसी संकल्प को आगे बढ्ाने की जरूरत है, तभी भारत एक बार फिर विश्वगुरु बनेगा। शंकराचार्य अधोक्षजानंद देवतीर्थ सोमवार को माघमेेला क्षेत्र के सेक्टर पांच स्थित ओल्ड जीटी रोड स्थित श्री आद्यशंकराचार्य धर्मोत्थान संसद के शिविर में आयोजित डा. उत्तम चंद शास्त्री जन्म शताब्दी समारोह के अन्तर्गत आयोजित ‘सनातन ज्ञान परंपरा और संस्कृत‘ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। आयोजन श्री आद्य शंकराचार्य धर्मोत्थान संसद और चूड़ामणि संस्कृत संस्थान, बसौली, जम्मूकश्मीर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
शंकराचार्य अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने पंडाल में उपस्थित विद्वानों, साधु संतों, राजनीतिज्ञों व अन्य लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि शंकराचार्य देश के धार्मिक संरक्षक होते हैं। आज भी धर्मसत्ता के प्रति लोगों का विश्वास है। इसे ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी समझते हैं। वे समझते हैं कि गेरुआ त्याग का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि धर्म गुरुओं के पास दिव्य शक्ति है। इसे सबको समझने की जरूरत है। आज देश उत्तर पूर्व क्षेत्र के लोगों के सनातन संस्कृति के प्रति गजब का समर्पण और उत्साह देखने को मिल रहा है। यही कारण है कि यहां मंच पर असम और अरुणाचल प्रदेश के मंत्री मौजूद हैं। असम में हेमंत विस्वा सरमा की सरकार गोसंरक्षण के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जम्मूकश्मीर मंें चूड़ामणि संस्थान संस्कृत के उत्थान के लिए दिव्य कार्य कर रहा है। इसके लिए संस्थान के मुख्य न्यासी व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शक्ति पाठक बधाई के पात्र हैं। शंकराचार्य ने कहा कि इस तरह के आयोजन पूरे देश में होंगे और गुरुकुल की स्थापना की जायेगी।
इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के मंत्री तागे तकी ने कहा कि हमारा प्रदेश सनातन धर्म की मुख्य परंपराओं को सहेजे हुए है। वहा दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थित है। देश के एक नागरिक होने के नाते सनातन संस्कृति और संस्कृति हमारे संस्कार में रचा बसा है। हम इसे महसूस करते हैं। हमारे भीतर सनातन संस्कृति के बीज हैं। एक दिन यही वटवृक्ष का रूप लेगा। भारत अध्यात्म एक विज्ञान के क्षेत्र में वल्र्ड लीडर बनेगा। इस अवसर पर असम के मंत्री बोलिन सेतिया ने कहा कि असम पूर्वोत्तर का द्वार है। हमारे प्रदेश में गो तस्करी और व्यापार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कारोबार करीब 20 हजार करोड़ का था। आज हर जिले में गोशाला खुल रहे हैं। हमारे मुख्य मंत्री ने गोमाता पर ध्यान दिया है। पूर्वोत्तर के लोग शंकराचार्य को बहुत सम्मान देते हैं। उनके प्रभाव से वहां सनातन धर्म और संस्कृति का विस्तार हो रहा है।
इस अवसर पर प्रो. मदन मोहन झा ने जम्मू कश्मीर में संस्कृत के प्रचार प्रसार के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृत के शास्त्रीय रूप का प्रयोग होना चाहिए। हम संस्कृत के सरलीकरण के नाम पर व्याकरण की मर्यादा को नहीं छोड़ सकते। इस अवसर पर चूड़ामणि संस्थान के मुख्यन्यासी शक्ति पाठक ने कहा कि पूर्वोत्तर और जम्मूकश्मीर से जो धारा आयी है, वह आज संगम में मिली है। इसके लिए वह शंकराचार्य जी के प्रति आभारी हैं। जम्मू कश्मीर में संस्कृत को जनजन तक पहुंचाया जायेगा। इस अवसर पर प्रो. राम सलाही द्विवेदी ने कहा कि जो भाषा अपनी संस्कृति से जुड़ी होती है, वही आगे बढ़ती है। हमारी सनातन परंपरा संस्कृत में ही संरक्षित है। हम अनुष्ठान से समझौता न करें। वहीं प्रो. सुधाकर मिश्र ने कहा कि समर्थ लोग अपने बच्चों को संस्कृत पढ़ाना नही ंचाहते हैं। काले मैकाले संस्कृत को दूसरी ओर ले जाना चाहते हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। इस अवसर पर कई विद्वानों को डा. मणिशंकर द्विवेदी ने सम्मानित किया। संचालन अभिषेक कुमार उपाध्याय ने किया। स्वागत भाषण वरिष्ठ पत्रकार पीएन द्विवेदी ने दिया। श्री द्विवेदी ने कार्यक्रम के लिए शंकराचार्य देवतीर्थ के प्रति आभार व्यक्त किया तथा कहा कि इस तरह के आयोजन उनके सान्निध्य में पूरे देश में होंगे। शंकराचार्य देश और विदेश में सनातन संस्कृति के उत्थान में जुटे हैं, यह हम सब सनातन धर्मियों के लिए गौरब की बात है। इस अवसर पर आदिशंकराचार्य व मंडन मिश्र के शास्त्रार्थ का भी मंचन किया गया।
