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“प्रयागराज कल्चरल एंड हेरीटेज वॉक शुरू हुआ,महाऋषि भरद्वाज के गुरुकुल से हुई शुरुआत

“प्रयागराज कल्चरल एंड हेरीटेज वॉक शुरू हुआ,महाऋषि भरद्वाज के गुरुकुल से हुई शुरुआत

प्रयागराज ।प्रयागराज सनातन धर्म के लिए दुनिया में सर्वश्रेष्ठ स्थान है। यहां पर मानव जीवन की कला विकसित की गई ।प्रयागराज तीर्थ क्षेत्र है यहां पर गुरुकुल में विद्या अध्ययन किया जाता रहा। तीर्थों में सर्वश्रेष्ठ स्थान है ।यह व्यक्ति के मुक्ति का द्वार है। ऋषि मुनि ने तरह-तरह के अविष्कार करके हमारी दुनिया आसान की है। इन्हीं में से एक महर्षि भरद्वाज के गुरुकुल स्थान पर आज “प्रयागराज जानो” शुरुआत हो रही है।
“प्रयागराज कल्चरल एंड हेरीटेज वॉक शुरू हुआ है जो आने वाले दिनों में प्रयागराज की महिमा का एक वैचारिक केंद्र होगा।
उक्त बातें प्रोफ़ेसर के वी पांडे पूर्व अध्यक्ष लोकसेवा पूर्व कुलपति ने भारत भाग्य विधाता प्रयागराज विद्युत परिषद व अन्य संस्थाओं के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर कहीं।
उन्होंने कहा कि आज भी महर्षि भरद्वाज के बारे में बहुत कम जानकारी लोगों को है ।मैंने भी यही से रिसर्च किया है किंतु 200 गज दूर विश्वविद्यालय में मैं उस समय यह जान ना सका कि मेरी ही विधा के सर्वश्रेष्ठ अविष्कारक इसी स्थान पर है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के लिए मुझसे जो भी बनेगा मैं करूंगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व आईपीएस श्री लालजी शुक्ला ने कहा कि प्रयागराज की महिमा अपरंपार है । तीनों लोगों में सर्वश्रेष्ठ तीर्थ स्थान है। यहां पर अध्ययन चरम पर पहुंचता है ।गुरुकुलों का क्षेत्र है, और पुण्य क्षेत्र में यहां की सांस्कृतिक विरासत परिचर्चा होना आवश्यक है। अभी तक बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो यहां की महिमा नहीं जानते ,। यह कार्यक्रम पर्यटन को बढ़ावा देगा साथ ही सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक ले जाएगा।
उन्होंने कहा कि हम अपनी परंपरा अपनी मूल बातों को भूलते जा रहे हैं प्रयागराज के बुद्धिजीवियों का कर्तव्य है कि वह दिशा दिखाएं ,लोगों का मार्गदर्शन करें जिससे आने वाली पीढ़ी को सही दिशा मिल सके।
इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक वीरेंद्र पाठक ने विषय प्रवर्तन करते हुए बताया कि प्रयागराज के तथ्य पूर्ण इतिहास यहां की संरचनाओं के बारे में जानकारी तथा धार्मिक ऐतिहासिक महत्व को बताने के लिए :प्रयागराज कल्चर एंड हेरीटेज वॉक ” शुरू किया जा रहा है ।साथ ही प्रयागराज से संबंधित दुर्लभ चित्र प्रदर्शित किए जाएंगे जिससे आम लोग भी जान सके । इस तरह के कार्यक्रम से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा साथ ही प्रयागराज के ऐतिहासिक महत्व को भी लोग जान पाएंगे । रैना ने बताया कि विषय विशेषज्ञ सांस्कृतिक विरासत पर अपनी बात रखेंगे साथ ही उनसे संवाद भी किया जाएगा।
इस अवसर पर अभिषेक मिश्रा ने संचालन किया तथा डॉ प्रमोद शुक्ला ने सभी का स्वागत किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ रंजन बाजपेई ने दिया। भरद्वाज जी की विशाल प्रतिमा स्थल पर चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई थी
इसके पूर्व प्रयागराज के दुर्लभ चित्र की प्रदर्शनी का उद्घाटन डॉक्टर केबी पांडे ने किया। प्रदर्शनी में 100 साल पूर्व के प्रयागराज तथा यहां आयोजित कुंभ मेले के चित्र लगे थे 1954 में कुंभ हादसे के चित्र भी लगे थे ।कार्यक्रम में जानकी शरण दास रामनरेश त्रिपाठी अंशुल त्रिपाठी श्री रंजन शुक्ला बृजेंद्र मिश्रा श्री वल्लभ विश्व अभय अवस्थी सुधीर द्विवेदी कमल शर्मा

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