Thursday, January 29Ujala LIve News
Shadow

खट्टी मीठी यादों के साथ 15 दिवसीय प्रकाश अभिकल्पन कार्यशाला का हुआ समापन

 

खट्टी मीठी यादों के साथ 15 दिवसीय प्रकाश अभिकल्पन कार्यशाला का हुआ समापन

NCZCC में 15 दिवसीय प्रकाश अभिकल्पन कार्यशाला का समापन हुआ। केंद्र निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा ने कार्यशाला के समापन अवसर पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. सुरेश भरद्वाज को पुष्प गुच्छ व शाल देकर उन्हें सम्मानित किया। प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशाला युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करती है, वही विशेषज्ञों की देखरेख में इन प्रतिभाओं को निखारा भी जाता है। कार्यशाला में प्रो. सुरेश भारद्वाज के निर्देशन में युवाओं ने बहुत कुछ सीखा है, जिसका वे स्वतंत्र रूप से प्रयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि रंगमंचीय विधा शैक्षणिक स्तर से कही ज्यादा प्रयोगिक होती है, सीखने की कला कभी खत्म नहीं होती है युवा पीढी को लगातार सीखते रहना चाहिए। उन्होंने भविष्य में ऐसी कार्यशालाएं आयोजित करने को विश्वास दिलाया।
30 से ज्यादा प्रतिभगी इस कार्यशाला से लाभान्वित हुए-
प्रकाश अभिकल्पन कार्यशाला एक ऐसा प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें युवाओं को सांस्कृतिक मंच को फोकस लाइट से रंगीन करने का हुनर सिखाया गया। अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण देने के लिए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. सुरेश भरद्वाज और बिस्मिल्लाह खां संगीत नाटक अकादमी सम्मना से सम्मानित गोविन्द सिंह यादव ने युवाओं के साथ अपना अनुभव साझा किया। इस कार्यशाला में स्थानीय लोगों के साथ राजस्थान, बिहार, दिल्ली के 30 से ज्यादा प्रतिभगी इस कार्यशाला से लाभान्वित हुए। अभ्यर्थियों ने कार्यशाला के सफल आयोजन पर बधाई दी।

15 दिनों तक रंगमंचीय प्रकाश के बारीकियों की दी गई जानकारी
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. सुरेश भरद्वाज और बिस्मिल्लाह खां संगीत नाटक अकादमी सम्मन से सम्मानित गोविन्द सिंह यादव के निर्देशन में प्रतिभागियों को प्रकाश के इतिहास से लेकर रंगमंच में प्रकाश अभिकल्पन का कैसे प्रयोग किया जाता है तथा की लाइट, फिल लाइट, बैक लाइट, प्रोग्रमिंग लाइट एवं दृश्यों के अनुसार प्रकाश का अभिकल्पन किस प्रकार करना चाहिए आदि के बारीकियों से प्रशिक्षित किया गया।
क्या कहते हैं प्रो. सुरेश भारद्वाज-
कार्यशाला के समापन पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्य बहुमुखी प्रतिभा के धनी प्रो. सुरेश भरद्वाज ने प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि युवाओं के अपने दायरे सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्हें सीखने के जो भी अवसर मिले उसे जाया नहीं करना चाहिए। चुनौतियां हर जगह हैं इनका डटकर सामना करना चाहिए।
2005 में संगीत नाटक अकादमी सम्मान से नवाजे जा चुके प्रो. सुरेश भारद्वाज ने रंगमंच के अपने शुरुआती दिनों की यादें करते हुए बताया कि उन्होंने हर क्षेत्र में सफलता पूर्वक हाथ आजमाए, जिसकी बदौलत वह सिर्फ निर्देशन में ही नहीं अपितु एक सफल लेखक, सैट डिजाइनर, लाइट डिजाइनर एवं एक बेहतरीन अभिनेता बनकर उभरे।
कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले अभिषेक ने कहा कि एक रंगकर्मी होने के नाते हर विधा के बारे में जानना ज़रूरी है , लाइट नाटक का एक प्रमुख बिंदु है इस कार्यशाला के ज़रिए हमने लाइट की प्रोग्रामिंग , पैचिंग , नाटक के मूड के हिसाब से लाइट और रंगो का इस्तेमाल और सीन वर्क के साथ ही अन्य काफ़ी पहलुओं को जाना ।इन सारी चीज़ो को सीखने का मौक़ा मिला। वही सविता ने बताया कि एनसीजेडसीसी की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में मेमोरी से लाइट बनाने की बारीकियों को सीखने का मौका मिला इसी क्रम में प्रकाश सिंह, निहारिका, आर्यन, रोशन ने भी अपने अनुभव साझा किया। कार्यशाला की रूपरेखा मधुकांक मिश्रा ने किया। इस मौके पर केंद्र के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *