Thursday, January 29Ujala LIve News
Shadow

हिंदी साहित्य सम्मेलन के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ0 प्रभात शास्त्री की 105 वीं जयंती पर विभूतियों का हुआ सम्मान

हिंदी साहित्य सम्मेलन के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ0 प्रभात शास्त्री की 105 वीं जयंती पर विभूतियों का हुआ सम्मान

रिपोर्ट:आचार्य श्री कांत शास्त्री

स्वर्णयुग के युगों वाली परंपरा की पीढ़ी में डॉ प्रभात शास्त्री का स्थान सर्वोपरि – प्रो. हरिदत्त शर्मा,हिंदी साहित्य सम्मेलन के उन्नायक एवं पूर्व प्रधानमंत्री डॉ प्रभात शास्त्री की 105 वी जयंती पर हिंदी साहित्य सम्मेलन के हिंदी संग्रहालय सभागार में डॉ अरविंद कुमार राम (प्रयागराज) डॉ बाबूलाल मीणा (राजस्थान) एवं प्रो सदाशिव कुमार द्विवेदी (वाराणसी) को संस्कृत महामहोपाध्याय सम्मान से अलंकृत किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. हरिदत्त शर्मा थे। सर्वप्रथम दीप प्रज्ज्वलन के बाद अतिथियों ने डॉ प्रभात शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण करके कार्यक्रम की शुरुआत की। सम्मान समारोह के बाद अपने वक्तव्य में प्रयागराज के डॉ अरविंद कुमार राम ने कहा कि वैश्विक स्तर पर हिंदी के विकास और संवर्धन में लगभग ढाई दशक तक डॉ प्रभात शास्त्री जी का अविस्मरणीय योगदान रहा। उन्होंने कहा कि कालखंड का विभाजन तो किया जा सकता है लेकिन संस्कृत और हिंदी में कोई भी विभाजन नहीं किया जा सकता। भारतीय वांग्मय में श्रीमद्भागवत गीता और श्रीमद् महापुराण ऐसे दो ग्रंथ है जिसने संपूर्ण मानवता को एकता के सूत्र में पिरोया है। प्रो सदाशिव द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि डा प्रभात शास्त्री जी एक ओर जहां संस्कृत के विद्वान गीतकार, ईमानदार साहित्यकारों के प्रति सद्भावी वाले व्यक्ति थे वहीं दूसरी ओर साहित्यिक राजनीति के महारथी भी थे। राजस्थान के डॉ बाबूलाल मीणा ने कहा कि डा प्रभात शास्त्री की सभी पुस्तकें एक से बढ़कर एक हैं इनका अध्ययन करना मेरे लिए बहुत गौरव और प्रसन्नता की बात है। संस्कृत और हिंदी जगत की सेवा में डॉ प्रभात शास्त्री का अद्वितीय योगदान रहा है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और इलाहाबाद विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. हरिदत्त शर्मा ने कहा कि स्वर्ण युग के युगो वाली परंपरा की पीढ़ी में डॉ प्रभात शास्त्री का स्थान सर्वोपरि है, शास्त्री जी ने अनेकों स्थानों से हस्तलिखित पांडुलिपियों को खोजकर हिंदी संग्रहालय में शोधार्थियों के लिए रखवाये। डा प्रभात शास्त्री जी की आत्मा में भी संस्कृत बसती थी भले ही वह हिंदी का कार्य करते हो। संस्कृत की शोध पत्रिका संगमनी उनके लिए अमूल्य निधि थी जिसका वो संपादन करते थे। उन्होंने आगे कहा कि संस्कृत के लिए की गई उनकी सेवाओं का हिंदी साहित्य सम्मेलन सदैव ऋणी रहेगा। हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री विभूति मिश्र ने भी डा प्रभात शास्त्री पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन शेषमणि पांडेय और आभार ज्ञापन सम्मेलन के सहायक मंत्री श्यामकृष्ण पांडेय ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रबंध मंत्री कुंतक मिश्र, साहित्यमंत्री प्रो रामकिशोर शर्मा, अर्थमंत्री रमानिवास पांडेय, किरणबाला पांडेय, राजकुमार शर्मा, शेषनारायण शुक्ला, धनंजय चोपड़ा, विवेक सत्यांशु, पद्माकर मिश्र, अंजनी कुमार शुक्ला, नरेंद्र देव पांडेय, पवित्र तिवारी सहित सैकडों हिंदी प्रेमी उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *