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सात दिवसीय कार्यशाला में सूक्ष्मजीवों के विश्लेषण की जैवप्रौद्योगिकी निष्कर्षणन की जानकारी साझा की गई

सात दिवसीय कार्यशाला में सूक्ष्मजीवों के विश्लेषण की जैवप्रौद्योगिकी निष्कर्षणन की जानकारी साझा की गई

 


नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग, फॉरेस्ट रिसर्च सेंटर, प्रयागराज तथा इको हेल्थ बायोसाइंस इंडस्ट्रीज, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे सात दिवसीय कार्यशाला सूक्ष्मजीवों के विश्लेषण की जैवप्रौद्योगिकी निष्कर्षणन के तृतीय दिन के आमंत्रित वक्ता डॉ. शैलेन्द्र सिंह, सहायक आचार्य, जैव रसायन विभाग, एस. एस. खन्ना गर्ल्स डिग्री कॉलेज, प्रयागराज ने बताया कि सूक्ष्म जीवों में सूक्ष्म शैवाल, नील हरित शैवाल के स्टार्टअप आधारित तकनीकी के प्रयोग से सस्टेनेबल उत्पाद वैश्विक और भारतीय बाजार में जैसे शैवाल प्लेट, गिलास के निर्माण में बायोजोरप्शन द्वारा गंदे जल के शुद्धिकरण करने में अति महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर डा. शक्ति नाथ त्रिपाठी, डॉ. प्रदीप उपाध्याय, डॉ. धीरज पाण्डेय तथा डॉ आदि नाथ ने तकनीकी सत्र में प्रतिभागियों को प्रोटीन एस्तिमेशन, लोरी विधि , ब्रेडफोर्ड विधि तथा स्पेक्रोस्कोपी विधि से परिचित करवाया और प्रतिभागियों ने स्वयं अभ्यास किया एवं प्रश्नों का शंका समाधान किया गया। कार्यक्रम में अर्पिता त्रिपाठी, तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद, मरियम बानो, जयंती, अमूल, तिवारी, अंकुर श्रीवास्तव, नम्रता यादव, कविता सिंह तथा स्वाति शुक्ला, अंशुमान दुबे, ऋषिराज आदि सम्मिलित सम्मिलित रहे।

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