“पापा खो गए” नाटक में दिखी बाल कलाकारों की प्रतिभा,ग्रीष्मकालीन कार्यशाला का हुआ समापन

23 मई से कार्याशाला की हुई थी शुरूआत
एनसीजेडसीसी की ओर से आयोजित तीस दिवसीय ग्रीष्मकालीन बाल कार्यशाला का समापन मंगलवार को केंद्र के प्रेक्षागृह में हुआ। नाट्य कार्यशाला के बच्चों ने विजय तेंदुलकर की कहानी पर आधारित जीव एवं निर्जीव के आपसी प्रेम की नाट्य प्रस्तुति थिएटर इन एजूकेशन के माध्यम से “पापा खो गए” का भावपूर्ण मंचन किया।
इस नाटक के द्वारा दिखाया गया कि हम अपने आसपास की निर्जीव चीजों जिसमें, बिजली खम्भे, लेटर बॉक्स, पंक्षी हम से आपसी संबंध कैसे बनाए एवं उनके प्रति कितना संवेदनशील हैं। नाटक के मुख्य पात्र नंदनी, अंजनेय, राम, रूद्र, बालकृष्णन, निवेश, आराध्या अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। बच्चों के मंच पर आते ही दर्शकों ने तालियों की खूब गडगडाहट से उनका हौसलाफजाई किया। नाटक में बाल कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जो उन्होंने 30 दिनों के ग्रीष्मकालीन कार्यशाला में सीखा था। यह नाटक अविनाश देशपांडे के निर्देशन में बच्चों द्वारा लिखा गया था।
कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षक अविनाश देशपांडे एवं सिद्धार्थ पाल को स्मृति चिह्न भेंट कर केंद्र के अधिकारी अनूप श्रीवास्तव एवं आशीष श्रीवास्तव द्वारा स्वागत किया गया एवं केंद्र निदेशक की ओर से केंद्र के अधिकारी आशीष श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन मनोज कुमार ने किया।
