इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड स्टेटिस्टिक्स कानपुर द्वारा राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया गया

चतुर्प्रमाण आधारित आयुर्वेदीय सिद्धांत त्रिकाल सिद्ध हैं – प्रो जी एस तोमर,इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड स्टेटिस्टिक्स कानपुर द्वारा राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर पर एक राष्ट्रीय वेबीनार आयोजित किया । जिसके मुख्य अतिथि के रूप में आई सी एम आर के पूर्व ए डी जी डॉ पदम सिंह उपस्थित रहे । कार्यक्रम के प्रारम्भ में डॉ पदम सिंह आर एण्ड डी स्कीम के राष्ट्रीय संयोजक डॉ शुभम पाण्डेय ने अतिथियों का स्वागत किया एवं सांख्यिकी दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य पर प्रकाश डाला । उन्होंने स्पष्ट किया कि
सांख्यिकी और आर्थिक योजना निर्माण के क्षेत्र में (स्वर्गीय) प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस द्वारा किए गए उल्लेखनीय योगदान के सम्मान में भारत सरकार 2007 से प्रत्येक वर्ष उनकी जयंती 29 जून को “सांख्यिकी दिवस” के रूप में मना रही है । ‘भारतीय सांख्यिकी के पिता’ के रूप में सम्मानित, प्रोफेसर महालनोबिस महालनोबिस दूरी विकसित करने के लिए प्रसिद्ध हैं, एक सांख्यिकीय उपाय जिसका उपयोग एक बिंदु और वितरण के बीच असमानता को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
इसको बाद अतिथि वक्ता के रूप में महर्षि चरक आयुर्वेद रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट स्कीम के अध्यक्ष प्रो (डॉ) जी एस तोमर ने आयुर्वेदीय शोध में सांख्यिकी की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला । प्रो तोमर ने कहा कि वेद विश्व वांग्मय के प्राचीनतम ग्रंथ के रूप में स्वीकार्य हैं । अथर्ववेद का उपांग होने के कारण इसकी प्राचीनता स्वयमेव स्वीकार्य है । हज़ारों साल पहले यद्यपि हमारे प्राचीन महर्षियों ने गम्भीर चिंतन एवं शोध के बाद ही विविध सिद्धांतों का प्रतिपादन किया है । तथापि आज के वैश्विक परिदृश्य में इन्हें आज के प्रचलित वैज्ञानिक मापदंडों पर प्रमाणित करना समय की महती आवश्यकता है । तभी हम वैश्विक जन मानस को इन्हें ग्राह्य बना सकेंगे । सांख्यिकी ही वह सशक्त माध्यम है जिसके द्वारा हम अपनी शोध को वैज्ञानिक कलेवर प्रदान कर जन सामान्य के लिए ग्राह्य एवं उपयोगी बना सकते हैं । आयुर्वेद आप्तोपदेश, प्रत्यक्ष, अनुमान एवं युक्ति चार प्रमाणों के आधार पर सिद्ध ज्ञान है । जब कि पाश्चात्य विज्ञान मात्र एविडेन्स आधारित ज्ञान है । जो कि प्रमाण की तुलना में अति संकीर्ण है । यही कारण है कि आज के वैज्ञानिक सिद्धांत विकास की धारा के साथ परिवर्तनशील हैं । जब कि प्रमाण आधारित आयुर्वेदीय ज्ञान त्रिकाल सिद्ध है ।
इस अवसर पर सी एफ हेनीमेन होम्योपैथी रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट स्कीम के अध्यक्ष डॉ बी एन आचार्य ने होम्योपैथी में शोध की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए । इसी क्रम में फ़्लोरेंस नाइटेंगल नर्सिंग आर एंड डी स्कीम के अध्यक्ष डॉ राजेश शर्मा ने नर्सिंग एवं हेल्थकेयर शोध में सांख्यिकी की भूमिका पर अपने विचार रखे । इसके बाद आर ए डेन्टल आर एण्ड डी स्कीम के अध्यक्ष डॉ नीरज अग्रवाल ने दंत चिकित्सा की शोध में सांख्यिकी के महत्व को रेखांकित किया । इसी के सातत्य में महर्षि चरक आर एंड डी स्कीम की समन्वयक डॉ सीमा द्विवेदी ने अपने उद्वोधन में कहा कि सांख्यिकी दिवस का महत्व युवा पीढ़ी में रणनीति, आर्थिक योजना और नीति निर्माण में सांख्यिकी की भूमिका और महत्व के बारे में सार्वजनिक जागरूकता पैदा करना है। इस अवसर को सांख्यिकी के क्षेत्र में प्रोफेसर महालनोबिस की उपलब्धियों से सीखने के लिए एक अनुस्मारक के रूप में मनाया जाता है। मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्वोधन में डॉ पदम सिंह ने जीवन के विविध क्षेत्रों में सांख्यिकी की उपयोगिता को विस्तार से बताया । वेबीनार में देश के कोने कोने से स्वास्थ्य, स्टेटिस्टिक्स, एवं शिक्षण आदि से सम्बन्धित 800 से अधिक प्रतिभागियों ने लाभ लिया । कार्यक्रम का संचालन मोहिनी वर्मा ने किया । धन्यवाद ज्ञापन डॉ अवनीश पाण्डेय ने किया ।
