हिन्दी साहित्य सम्मेलन का इतिहास और हुआ समृद्ध
हिन्दी साहित्य सम्मेलन का इतिहास और हुआ समृद्ध
प्रयागराज
किसी साहित्यिक संस्थान की प्रगति और समृद्धि का आधार उसकी पत्रिका और उसके द्वारा प्रकाशित पुस्तकें आदि होती हैं। इस दृष्टि से हिन्दी साहित्य सम्मेलन का इतिहास बड़ा ही समृद्ध रहा है। यहाँ से प्रकाशित पत्रिकाएँ (सम्मेलन पत्रिका, राष्ट्रभाषा संदेश, माध्यम) हिन्दी साहित्य जगत की मानक और विचारोत्तेजक पत्रिकाएं सिद्ध हुईं। साहित्य के क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाली पत्रिका ‘माध्यम’ संयोगवश एक अरसे से बंद थी। अगर इसके इतिहास पर दृष्टिपात करें तो देखते हैं कि हिन्दी के महत्वपूर्ण कवि बालकृष्ण राव के सम्पादन में १९६४ में सम्मेलन के तत्कालीन प्रधानमन्त्री प्रभात मिश्र जी के सहयोग से इसका साहित्यिक प्रवेश हुआ। इसके बाद १९६९ तक उन्होंने बखूबी इसके सम्पादन का कार्य किया। कतिपय कारणों से १९६९ में इसका प्रकाशन बंद हो गया, किन्तु २००१ म...









