इंसानियत मोहब्बत तहजीब और अकीदत का पैगाम देने के लिए उठाया गया। । बडा ताजिया
इंसानियत मोहब्बत। तहजीब और अकीदत का पैगाम देने के लिए उठाया गया बडा ताजिया
*क्या हक अदा करेगा जमाना हुसैन का*
*अब तक जमीन पर कर्ज है सजदा हुसैन का*
*झोली फैला के मांग लो मोमिनो*
*हर दुआ कबूल करेगा दिल हुसैन का*
(अकरमशगुन)
प्रयागराज माहे मोहर्रम की दस तारीख को बड़ा ताजिया उठाया गया बाद नमाज जोहर तजिया उठाया गया ताजिया बड़े ताजिया में गश्त करने के बाद जॉनसेन गंज चौराहा पहुंचता है यहां पर हुसैन के शैदाइयों की भारी भीड़ होती है इस भीड को कंट्रोल करने के लिए बहुत मेहनत करना पड़ता है हर कोई बोसा लेने फूल चढ़ाने मन्नत मांगने मन्नत की चीजे चढ़ाने के लिए बेचैन नजर आया।
लाखों शहादतों के बाद हम आज यौमे आशूरा हुसैनी गम मना रहे हैं सुबह से ही बड़े ताजिए पर मन्नत के फूल चढ़ाया जा रहा था लंगर किया जा रहा था खाने पीने की चीज लोगों के हाथ में दिया जा रहा था पानी और शरबत का माकूल इंतजाम था बड़ा...









