एकता की मार्मिक नाट्य प्रस्तुति बुढ़िया का चश्मा
एकता की मार्मिक नाट्य प्रस्तुति बुढ़िया का चश्मा
प्रयागराज।सांस्कृतिक संस्था "एकता" द्वारा "बुढ़िया का चश्मा" नाटक का मंचन शनिवार को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में किया गया। बुढ़िया का चश्मा डॉ मोहनलाल गुप्ता के लघु नाटक से प्रेरित एक मार्मिक प्रस्तुति है।इसका पुनर्लेखन,परिकल्पना एवं निर्देशन युवा रंगकर्मी निखिलेश कुमार मौर्य ने किया।
यह नाटक भ्रष्ट राजनीति के कारण मिटती संवेदनाएं और बढ़ती आकांक्षाओं पर करारा व्यंग्य है।नाटक में आज़ादी के सपनों और वर्तमान की सच्चाइयों के बीच अंतर को दिखाने का प्रयास किया गया ।कहानी एक युवा (आज़ाद भारत माता की प्रतीक)से शुरू होती है।जो 1947 में न्याय, प्रेम और समानता का सपना देखती है।साल दर साल गुजरते जाते है।दशकों बाद वही बुढ़िया थकी - झुकी मोटा चश्मा पहने अपने अधूरे सपनों का बोझ उठाए दिखाई देती हैं।वह देखती है धर्म के नाम...









